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मौलानाओं पर आंख बंद कर विश्वास ना करे मुसलमान

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सहारनपुर। तीन तलाक के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता फरहा फैज ने कहा कि मुस्लिम मौलानाओं पर आंख बंद कर विश्वास न करें। अल्लाह की शरीयत को माने, मौलाना द्वारा बनाई गई शरीयत का बहिष्कार करें। उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को जागरूक करने के लिए मुहिम चलाई जाएगी। उन्होंने मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के फैमिली एक्ट पर भी सवाल उठाए।
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राष्ट्रवादी मुस्लिम महिला संघ की अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता फरहा फैज ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ट्रिपल तलाक कानून को लेकर मौलानाओं के नजरिए में अभी कोई बदलाव नहीं आया है। दिक्कत यह है कि मुस्लिम अशिक्षित होने के कारण मौलाना जो कहे, उसे ही सही मानता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह कानून आगे चलकर परमानेंट रूप से लागू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि तीन तलाक कानून में एफआईआर के साथ गुजारा भत्ते की व्यवस्था की गई है। पीड़िता द्वारा एफआईआर द्वारा दर्ज कराने के बाद पुलिस आरोपी को कोर्ट में पेश करेगी। यदि आरोपी शौहर अपनी गलती को स्वीकारता है तो उसे जमानत देकर रिहा कर दिया जाएगा। यदि अपनी बात पर अडिग रहता है तो उसके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी। पेशी के समय ही मजिस्ट्रेट पीडिता के लिए गुजारा भत्ता भी तय कर सकेगा।
अधिवक्ता फरहा फैज ने कहा कि मौलाना मुस्लिमों में यह संदेश देने में कामयाब रहे है कि भाजपा मुस्लिम विरोधी है। इसलिए सरकार की अच्छी बात भी उन्हें पसंद नहीं आएगी। उन्हें भी भाजपा और संघ का एजेंट बताया जाता है। उन्होंने कहा कि संघ प्रमुख मोहन मोहन भागवत साफ तौर से बोल चुके है कि मुस्लिम के बिना हिंदुत्व नहीं है। उन्होंने कहा कि आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड रचित फैमिली एक्ट भी मुस्लिमों पर थोपा गया है। इस दौरान अधिवक्ता के साथ तौसिफा और शाहिबा भी मौजूद रही।
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