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11 अधिकारियों पर दो लाख 65 हजार का अर्थदंड लगाया

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सहारनपुर। राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने मंगलवार को कलक्ट्रेट में 51 वादों की सुनवाई करते हुए 11 अधिकारियों पर दो लाख 65 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। उन्होंने समय पर सूचना नहीं देने को गंभीर लापरवाही करार दिया।
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कलक्ट्रेट सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में हाफिज उस्मान ने बताया कि समय पर सूचना देने में हीला हवाली करने पर विकास प्राधिकरण सहारनपुर, तहसीलदार चंदौसी जिला संभल, तहसीलदार गुन्नौर जिला संभल, थानाध्यक्ष थाना नागल जिला सहारनपुर, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सहारनपुर, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक, सहकारिता बिजनौर, जिला पंचायत राज अधिकारी मुजफ्फरनगर, उपखंड अधिकारी विद्युत वितरण खंड गंगोह सहारनपुर, अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड खतौली जिला मुजफ्फरनगर और दुग्ध विकास विभाग बिजनौर पर प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है, जबकि प्रभारी चिकित्सा अधिकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मोरना जिला मुजफ्फरनगर पर 15 हजार रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया गया है। उन्होंने बताया कि 51 वादों की सुनवाई करते हुए 25 वादों को निस्तारण किया गया है। उन्होंने कहा कि लखनऊ निवासी असलम सिद्दीकी ने उत्तर प्रदेश खेल निदेशालय के जनसूचना अधिकारी से सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत कुछ बिंदुओं पर सूचना मांगी थी, कि लखनऊ के गोमती नगर विपिन खंड में बैडमिंटन एकेडमी खोलने के उद्देश्य से 10 एकड़ भूमि का विकास प्राधिकरण ने किया था, लेकिन इस एकेडमी में शादी विवाह के कार्यक्रम धड़ल्ले से किए जा रहे हैं। उन्होंने जानना चाहा था कि इस मामले में खेल निदेशालय ने क्या कार्रवाई की है। राज्य सूचना आयुक्त ने कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर मुख्य सचिव आवास विभाग को जांच करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी संबंधित अभिलेखों को 30 दिनों में आयोग के सामने पेश किया जाएं।
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फरहा फैज ने सौंपा सूचना आयुक्त को ज्ञापन
सहारनपुर। तीन तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता एवं याचिकाकर्ता फरहा फैज ने राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान को मंगलवार को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि उनके ऊपर किए गए हमलों की पांच अलग अलग थानों में एफआईआर दर्ज है। उन्होंने बताया कि वह अपने अपाहिज पति और 12 वर्षीय बेटी की सुरक्षा के लिए पुलिस महानिदेशक के समक्ष आवेदन किया था, लेकिन उनके आदेश का पालन करना तो दूर सूचना देने तक से इंकार कर दिया है। जबकि सूचना के अधिकार अधिनियम के अनुसार जीवन रक्षा से जुडे़ विषयों की सूचना 48 घंटे उपलब्ध कराने का प्रावधान है। उन्होंने मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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