डेंगू और दिमागी बुखार की दस्तक से चिकित्सा विभाग में हड़कंप
सहारनपुर। डेंगू के बाद दिमागी बुखार का मामला सामने आने के बाद से चिकित्सा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। चिकित्साधिकारियों ने तमाम सीएचसी और पीएचसी को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सामने आए दोनों मामलों की वजह जानने के लिए भी चिकित्सा विभाग की टीमें पड़ताल में जुट गई हैं।
अमर उजाला ने दो दिन पहले हकीकत नगर निवासी एक महिला को डेंगू होने का समाचार प्रकाशित किया था, जिसके बाद से चिकित्सा विभाग की टीम डेंगू मरीज और परिवार के संपर्क में है। मरीज में डेंगू की पुष्टि होने के तुरंत बाद नानौता में दिमागी बुखार से युवक की मौत होने का मामला सामने आया है, जिसके बाद से चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य अधिकारी और चिकित्सक भी नानौता में दिमागी बुखार से मौत के बाद से हैरान हैं। चिकित्सा विभाग ने अलर्ट जारी किया है। सीएचसी और पीएचसी पर आने वाले बुखार के मरीजों के खून के नमूने लेकर जांच कराने तथा प्रॉपर इलाज के निर्देश दिए गए हैं। नानौता में दिमागी बुखार के मामले में चिकित्सा विभाग की एक टीम ने शनिवार को मृतक के घर पहुंची और पूछताछ की। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उनके रिकार्ड में कई साल से दिमागी बुखार का कोई मरीज दर्ज नहीं है। यह बीमारी शहर ही नहीं जिले से भी खत्म हो चुकी है।
- कुछ लैब कर रहीं हैं मरीजों को गुमराह
जिला मलेरिया अधिकारी शिवांका गौड़ का कहना है कि कुछ लैब मरीजों को गुमराह करने का प्रयास करतीं हैं। डेंगू का मामला सामने आने के बाद बुखार से ग्रस्त मरीजों के मन में भय है। इतना ही नहीं, प्राइवेट चिकित्सक डेंगू की जांच के लिए मरीजों को पैथोलॉजी लैब में भेज रहे हैं। उनका कहना है कि मरीज सरकारी अस्पताल में इलाज कराएं। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल और सीएचसी व पीएचसी में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं। डेंगू की जो जांच प्राइवेट पैथोलॉजी लैब में महंगे दाम पर की जा रही है वह जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलज अंबाला रोड में पूरी तरह फ्री है। ऐसे में मरीज खर्च से बचने के लिए सरकारी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में जांचें कराएं।
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स्पेशल वार्ड तैयार, कंट्रोल रूम स्थापित
जिला मलेरिया अधिकारी शिवांका गौड़ का कहना है कि डेंगू और मलेरिया के फैलने की आशंका को देखते हुए चिकित्सा विभाग अलर्ट है। एसबीडी जिला अस्पताल में डेंगू और दिमागी बुखार के मरीजों के बेहतर इलाज के लिए दस-दस बेड के स्पेशल वार्ड बनाए गए हैं। गंगोह सीएचसी पर भी स्पेशल वार्ड की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा जिला अस्पताल में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जो 24 घंटे खुला है।
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ओपीडी में लग रही मरीजों की लंबी कतारें
बरसात में संक्रामक रोगों ने लोगों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। जिला अस्पताल के साथ ही प्राइवेट चिकित्सकों के यहां भी पहुंच रहे सामान्य मरीजों में ज्यादातर को बुखार, खांसी और जुकाम की शिकायत है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. कुनाल जैन ने बताया कि इन दिनों ओपीडी में पहुंच रहे मरीजों में ज्यादातर संक्रामक रोगों से ग्रस्त हैं, मगर इस बार उतनी संख्या में नहीं पहुंचे हैं, जितने गत वर्षों में पहुंचते थे।
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- 11 साल से नहीं आया दिमागी बुखार का मामला
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जनपद में वर्ष 2007 से दिमागी बुखार का कोई मामला सामने नहीं आया है। इसके अलावा विभाग डेंगू के केस में भी कमी आने का दावा कर रहा है। पिछले वर्ष डेंगू के 30 मामले सामने आने की बात कही गई है। उससे पहले डेंगू के मरीजों की संख्या 40 से 50 तक रहती थी। दावा है कि स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और जन जागरूकता अभियानों की वजह से लोगों में जागरूकता आई है, जिसकी वजह से डेंगू के मामलों में लगातार कमी आ रही है।
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-- डेंगू के मच्छर ने कहीं और काटा
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. शिवांका गौड़ ने बताया कि उन्होंने हकीकत नगर निवासी डेंगू की मरीज के परिवार से बात की है। जिसमें पता चला है कि डेंगू से ग्रस्त महिला करीब 20 दिन पहले परिवार के साथ हरिद्वार में एक धर्मशाला में ठहरी थी, जहां अत्यधिक संख्या में मच्छर और खटमल थे। डॉ. गौड़ का दावा है कि महिला को डेंगू के मच्छर ने हरिद्वार में ही काटा है। इसके अलावा उन्होंने नानौता में युवक की मौत की वजह भी अन्य बीमारी बताई है। उन्होंने बताया कि दिमागी बुखार से मौत की सूचना के बाद उन्होंने अपनी टीम मौके पर भेजी थी, जिसमें मृतक को अन्य गंभीर बीमारी होने का पता चला है, जिससे वह वर्षों से ग्रस्त था।