रामपुर मनिहारान (सहारनपुर)। पूर्वी यमुना नहर का पुल दो दशक से अधिक समय से टूटा पड़ा है। इसके निर्माण को लेकर एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को अपने खेतों तक जाने के लिए 15 किमी. का चक्कर अधिक काटना पड़ता है। इसके निर्माण की मांग को लेकर सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। चेताया कि यदि पुल का निर्माण नहीं किया गया तो वह आगामी लोकसभा चुनाव का पूर्ण रूप से बहिष्कार करेंगे।
गांव कल्लरपुर गुज्जर के पास पूर्वी यमुना नहर का पुल दो दशक से अधिक समय से टूटा पड़ा है। इसके निर्माण को लेकर गांव तुरमतखेड़ी की प्रधान मुरशीदा, सलेमपुर दिनेश, ढाकादेई खेड़ी शमशाद, कल्लरपुर डिंपल, प्रधान रेखा, विकास, भगवान सिंह, कीरत सिंह, किलाशो, बिमला, शकुंतला, श्याम सिंह, सरवर, विजयपाल आदि ने बताया कि पूर्व में वे प्रदेश तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, मायावती, मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, राजनाथ सिंह से मिलकर गुहार लगा चुके हैं परंतु आज तक पुल का निर्माण नहीं कराया गया। पुल के टूटने से तुरमखेड़ी, ढाकादेई, खैरसाल, राजपुर, हंगावली, कल्लरपुर गुर्जर, सतीवाला, चांदखेड़ी, सलेमपुर, नैनखेड़ी, जानखेड़ा आदि ग्रामीणों को 15 किमी. का अतिरिक्त चक्कर काट कर अपने खेतों एवं अन्य कार्यों के लिए जाना पड़ता है।
सोमवार को इस पुल से प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों टूटे पुल के पास एकत्रित होकर प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया और पुल निर्माण किए जाने की मांग की। चेतावनी दी है कि यदि पुल का निर्माण नहीं किया गया तो वह आगामी लोकसभा चुनाव का पूर्ण रूप से बहिष्कार करेंगे। प्रदर्शनकारियों में सुरेश, नीरज, गिरधारी, रामपाल, ओमप्रकाश, सुलेख, रफीक, अख्तर, सेठपाल, सुरेंद्र, धर्मपाल, योगेंद्र, कीरत सिंह, सचिन, बिट्टू, बबलू आदि रहे।
उधर पूर्वी यमुना नहर के अधीक्षण अभियंता अवधेश कुमार ने बताया कि उनके पास अब तक इसके निर्माण की मांग संबंधी कोई पत्र नहीं पहुंचा है। यदि ऐसी कोई मांग आती है तो पुल के निर्माण का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।