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शिक्षा कामयाबी और तरक्की की बुनियाद: मौलाना जमील

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देवबंद (सहारनपुर)। बसपा के पूर्व विधायक मौलाना जमील अहमद ने कहा कि सभी के लिए तालीम जरूरी है। क्योंकि तालीम के बगैर इंसान अधूरा है और ये कामयाबी और तरक्की की बुनियाद है।
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बृहस्पतिवार की रात्रि ईदगाह रोड स्थित दारुल उलूम फारुकिया में छात्रों की संस्था अंजुमन तहजीब-ओ-अदब के वार्षिक इजलास में बतौर मुख्य अतिथि मौलाना जमील अहमद ने कहा कि जब समाज तालीम याफ्ता होगा तभी देश तरक्की कर सकता है। जब तक अशिक्षा के धब्बे को नहीं मिटाया जाएगा तब तक गुमराही और उत्पीड़न को मिटाना नामुमकिन है। दारुल उलूम के उस्ताद मुफ्ती आदिल कासमी ने कहा कि कुरआन एक मुकम्मल किताब है, जिसमें परेशानियों को हल करने का तरीका भी मौजूद है। मगर हम खुद अपने धर्म और उसकी शिक्षाओं से दूर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि डेढ़ हजार वर्ष पूर्व मजहब-ए-इस्लाम ने ही समाजवाद का सबक दिया था और बुराइयों से रोका था। जमीयत उलमा-ए-हिंद (उत्तर प्रदेश) के सचिव सैय्यद जहीन अहमद ने कहा कि मानव अधिकार का जितनी इज्जत मजहब-ए-इस्लाम ने की है उसकी आधी भी किसी दूसरे धर्म ने नहीं की। इस्लाम ने इंसान को जिंदा रहने का हक दिया और उसकी हत्या को पूरी इंसानियत की हत्या करार दिया। अध्यक्षीय भाषण में संस्था के मोहतमिम मौलाना नूरुलहुदा कासमी ने कहा कि दुनियावी तालीम और दीनी उलूम के फैसलों को कम करके ही 21वीं सदी के तकाजों को पूरा किया जा सकता है। कहा कि दुनियावी तालीम के माहिर और मदरसों से फारिग होने वाले लोग अपनी दूरियों को खत्म करके एक दूसरे के साथ मिलकर काम करें। अगर मजहब से हटकर परेशानियों का हल तलाश किया गया तो इसका कोई नतीजा नहीं निकलेगा। संचालन संस्था के प्रबारी रहमतुल्लाह नूर ने किया। इस मौके पर मौलाना इमदादुल्लाह नूर, मुफ्ती मेराज गोंडवी, मौलाना नफीस बलरामपुरी, मौलाना अजीज, मुफ्ती शब्बीर आदि मौजूद रहे।
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