सहारनपुर। कांटे के मुकाबले में जीत हासिल करने के बाद भी सत्ताधारी भाजपा में गुटबाजी पूरी तरह से हावी है। महापौर के शपथ ग्रहण कार्यक्रम में भी गुटबाजी सतह पर दिखाई दी। समारोह में आनन-फानन में पंचायती राज मंत्री और क्षेत्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी से इस गुट ने अपनी ताकत दिखाई। इतना ही नहीं, नवनियुक्त महापौर संजीव वालिया को भी भूपेन्द्र सिंह गुट ने अपने साथ लाने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है। उधर, दूसरे खेमा भी इस जोर आजमाइश के चलते ज्यादा सतर्क है। कुल मिलाकर निकाय चुनाव में अपेक्षाकृत परिणाम नहीं आने के बाद भी भाजपा में गुटबाजी थमने का नाम नहीं ले रही है।
महापौर संजीव वालिया के शपथ ग्रहण समारोह में पंचायती राज मंत्री और क्षेत्रीय अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह मौजूदगी ने सबको चौंका दिया। इतना ही नहीं, शपथ ग्रहण समारोह पूरा होने से पहले ही मंत्री वहां से निकल गए थे। ऐसे में राजनीतिक गलियारे में तरह-तरह की चर्चाएं भी खूब हो रही है। दरअसल, भाजपा में लंबे समय से गुटबाजी हावी है और यही कारण है कि निकाय चुनाव के दौरान संगठन महामंत्री सुनील बंसल को यहां आना पड़ा। उन्होंने बेहद सख्त लफ्जों में चेतावनी दी थी, हालांकि इसका ज्यादा असर सहारनपुर में दिखाई नहीं दे रहा है। चुनाव में जीत के बाद अब महापौर संजीव वालिया को अपने गुट में शामिल करने की होड़ सी मची है। भाजपा में सहारनपुर में अब तक क्षेत्रीय अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह का गुट ही हावी रहा है। सांसद राघव लखनपाल शर्मा के तार दिल्ली से जुड़े होने के चलते स्थानीय स्तर पर ज्यादा हस्तक्षेप नहीं होता है। दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में आए विधायकों में महावीर राणा, प्रदीप चौधरी, डा. धर्म सिंह सैनी और मनोज चौधरी अब तक किसी गुट में पूरी तरफ से फिट नहीं हुए हैं। यही कारण है कि निकाय चुनाव में मिली जीत का श्रेय लेने की होड़ सी मची है। यहां बता दें कि पंचायती राज मंत्री भूपेन्द्र सिंह का पहले से कोई कार्यक्रम तय नहीं था, मगर अचानक उनका आना और कार्यक्रम पूरी तरह से समाप्त होने से पहले जाना भाजपा में ही चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल गुटों में बंटी भाजपा को निकाय चुनाव में भले ही जीत मिल गई है, मगर यह माना जा रहा है कि उसकी राह आसान नहीं होगी।