साढौली कदीम (सहारनपुर)। क्षेत्र की बंद पड़ी चीनी मिल को चलाने की सरकार की घोषणा हवाई साबित हो रही है। पिछले तीन वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिल को चलाने संबंधी अभी तक कोई कार्य शुरू नहीं किया गया है। इससे क्षेत्र के गन्ना किसान अपनी गन्ने की फसल को लेकर चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि मिल बंदी से क्षेत्र के हजारों किसान एवं मजदूर भुखमरी के कगार पर हैं।
वर्ष 1993 में यमुना खादर क्षेत्र में मात्र एक औद्योगिक इकाई शाकंभरी शुगर मिल गांव टोडरपुर में स्थापित की गयी थी। मिल स्थापना से क्षेत्र के किसान एवं मजदूर खुशहाली के पथ पर आगे बढ़ने लगे। वर्ष 2013-14 में मिल प्रबंधन ने इसे बीमार दर्शा कर बंद कर दिया। इससे क्षेत्र के हजारों किसानों को गहरा आघात पहुंचा। किसानों के अनुसार तभी से क्षेत्र के विकास पर विराम लग गया है। किसानों ने मिल चलाए जाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री के दरबार तक गुहार लगाई परंतु उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। योगी सरकार बनने के बाद किसानों को कुछ उम्मीद की किरण जगी। परंतु नवंबर माह बीतने पर भी मिल क्षेत्र में कोई साफ-सफाई कार्य देखने को नहीं मिला। बल्कि मिल परिसर में गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी शेरमउ में स्थापित चीनी मिल का कांटा लगा दिया गया।
गन्ना किसान ब्रिजेश काम्बोज, रणजीत सिंह, योगेन्द्र सिंह, राजेश कुमार, रविकुमार, शम्भूराम, साधूराम, किरणपाल, अफजाल, गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन चौ.ताहिर हसन, इरशाद, खालिद हसन, मो. इनाम प्रधान आदि का कहना है कि मिल स्थापना में टोडरपुर, चको, रोगला एवं दबकौरा आदि गांवों के सैकड़ों किसानों की हजारों बीघा जमीन ली गयी थी। क्षेत्र के लगभग पैंतीस हजार किसान मिल बंदी से परेशान होकर अपने गन्ने को कोल्हुओं पर औने-पौने दामों पर लुटाने को बाध्य हो रहे हैं। मिल क्षेत्र में इस बार लगभग 50 से 60 लाख कुंतल गन्ने की पैदावार की संभावना व्यक्त की जा रही है।
बेहट गन्ना सोसायटी में सचिव एसपी सिंह कहते हैं कि किसानों ने शासन से मिल चालू कराये जाने की मांग की है। अभी चीनी मिल चलाए जाने संबंधी कोई कार्यवाही अमल में नहीं है। किसानों का गन्ना अन्यत्र मिलों को दिया जाएगा।
38 बीघा भूमि कब्जामुक्त कराई
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गागलहेड़ी। सोमवार तीसरे पहर हरौड़ा अहतमाल में पहुंचे तहसीलदार सदर सुधीर कुमार ने राजस्व टीम ने पुलिस बल व प्रधान प्रतिनिधि साहब राव की मौजूदगी में लगभग 38 बीघा भूमि को अवैध कब्जा मुक्त कराया। टीम में कानूनगो फूलसिंह, लेखपाल बाबूराम, नरेश कुमार शामिल रहे।