देवबंद (सहारनपुर)। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर साहित्यिक व सामाजिक संस्था जहान-ए-अदब की ओर से महफिल-ए-मुशायरा का आयोजन किया गया। इसमें शायरों ने देर रात्रि तक यौम-ए-आजादी के तराने पेश किए। बृहस्पतिवार को मोहल्ला बेरुन कोटला स्थित उर्दू घर में आयोजित मुशायरे का उद्घाटन सलीम कुरैशी ने फीता काटकर जबकि अपना विचार मंच के अध्यक्ष नजम उस्मानी और नाहिद समर ने शमा रोशन कर किया। युवा शायर तनवीर अजमल ने पढ़ा.. हमने इस मुल्क को खून देके बचाया अजमल, हम मुसलमान हैं गद्दार नहीं हो सकते। रजी उस्मानी ने कहा.. यह मिट्टी थी हमारी और अब भी हमारी है, यह आजादी हमारी थी यह आजादी हमारी है। उस्ताद शायर शमीम किरतपुरी ने कुछ यूं कहा..न जाने कौन सी दुनिया में खो गया है तू, कि तेरे चेहरे पे पहली सी आबो ताब नहीं। युवा शायर वली वक्कास ने वतन से मोहब्बत पर अपने जज्बात कुछ यूं पेश किए.. सुकूं की नींद सोते हैं ये उनका कर्ज है हम पर, जो भारत मां के बेटे सरहदों पर जान देते हैं। नसीम सहारनपुरी ने कहा.. क्या खबर थी अपनी हक गोई सजा हो जाएगी, हम जबां वाले भी एक दिन बे-जबां हो जाएंगे। जकी माहिर ने कुछ यूं पढ़ा.. आज कहनी है गजल इसलिए जहनों दिल में, एक बेनाम सी तस्वीर बनाई जाए। दिलशाद खुशतर ने कहा.. हाथ से हाथ मिलाने वालों, दिल मिलाओ तो बात बन जाए। नाहिद समर ने कहा.. तुम्हारे हाथ की खुशबू बसी है मिट्टी में, महक रहे हैं अभी तक मेरे मजार के फूल।
इनके अलावा नफीस अहमद, पैदल देवबंदी, सलमान दिलकश, सलीम उस्मानी, अदनान अनवर, सुहेल अकमल आदि ने भी शानदार कलाम पेश कर देर रात्रि तक श्रोताओं की दाद बटोरी। कार्यक्रम में नजम उस्मानी और प्रसिद्ध कव्वाल नौशाद साबरी का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। अध्यक्षता वसीम उस्मानी व संचालन तनवीर अजमल ने किया। इस मौके पर नजीर अहमद, नवाब अख्तर, मौ. इरफान, मुस्तफा अहमद, मौ. नदीम आदि मौजूद रहे।