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गेहूं और सरसों की फसल पर माहू कीट का प्रकोप

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सहारनपुर। गेहूं और सरसों की फसल में माहू कीट का प्रकोप फिर दिखाई देने लगा है। काले रंग का यह कीट झुंड में रहता हैं। जो फसल की पत्तियों का रस चूसकर उसे कमजोर कर देते हैं। जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। आसमान में छाए हल्के बादल और मौसम में नमी के चलते इसका प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है।
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मौसम में उतार चढ़ाव के चलते गेहूं और सरसों की फसल में माहू कीट का प्रकोप दिखाई देने लगा है। इस कीट द्वारा निकाले गए चिपचिपे पदार्थ के चलते फसल की पत्तियों पर काली फफूंद जम जाती है, 15 फरवरी तक इस कीट का प्रकोप अधिक रहता है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि किसान आमतौर पर माहू कीट के लिए रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं। जिससे मधुमक्खियों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे सरसों पर परागित होने की प्रक्रिया रुक जाती है। जिसका उत्पादन पर विपरीत असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि इससे बचाव के लिए जैविक कीटनाशी का प्रयोग अधिक फायदेमंद रहता है। उन्होंने माहू की रोकथाम के लिए नीम ऑयल के दो प्रतिशत घोल या वर्टिसीलियम लेकानी जैव कारक के अलावा वेस्ट डिकम्पोजर का छिड़काव करना फायदेमंद रहता है।
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