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लोगों की जान ले रहा मच्छर का डंक, विभाग अभियान तक सिमटा

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सहारनपुर। मच्छर का डंक लोगों की जान ले रहा है। पिछले एक सप्ताह में जनपद में कई लोगों की जान डेंगू और मलेरिया की वजह से हो चुकी है। बावजूद इसके चिकित्सा विभाग लोगों को संक्रामक रोगों से बचाने के लिए केवल जन जागरूकता अभियान चलाने तक सीमित है।
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संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए चिकित्सा विभाग प्रत्येक वर्ष जागरूकता के लिए अभियान चलाता है। इस वर्ष भी संचारी रोग नियंत्रण सप्ताह और माह मनाए गए हैं, जिनके तहत चिकित्सा विभाग की टीमों ने घर-घर जाकर लोगों को रोगों से बचने के लिए जागरूक किया है। वर्तमान में भी एक से 15 अक्तूबर तक संचारी रोग नियंत्रण पखवाड़ा मनाया जा रहा है, जिसमें टीमें गांवों में चौपालों पर बैठकें कर लोगों को जागरूक कर रही हैं। उधर, पिछले दिनों हुई तीन दिन की बारिश के बाद मच्छरों की संख्या अचानक से बढ़ गई है, जो रात ही नहीं, दिन में भी लोगों पर हमला कर रही है। नतीजा यह है कि पिछले पांच/ छह दिन में बुखार के मामले बढ़े हैं। जिला अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि फिजीशियन की ओपीडी में प्रतिदिन पहुंच रहे मरीजों में से 70 फीसदी को बुखार की शिकायत है। जांच से 50 से 60 फीसदी में मलेरिया, 30 फीसदी में टायफाइड और शेष में सामान्य बुखार सामने आ रहा है। वर्तमान में अस्पताल के वार्ड मरीजों से फुल हैं। एक-एक बेड पर दो से तीन मरीज लेटे हैं।
देहात में भी संक्रामक रोगों का प्रकोप
देहात में संक्रामक रोगों ने बुरी तरह से लोगों को अपनी चपेट में लिया हुआ है। बेहट के अलग-अलग गांवों में दस दिन में तीन लोगों की मौत बुखार से हो चुकी है। बड़गांव में बुखार के काफी मामले सामने आ रहे हैं। शिमलाना में डेंगू दो लोगों की जान ले चुका है। नानौता के गांव माधोपुर में 24 वर्षीय महिला की चिकनगुनिया से मौत हो चुकी है। अंबेहटा में डेंगू से मौत हो चुकी है। लखनौती में असगर खान के 11 वर्षीय बेटे को डेंगू की पुष्टि हुई है, जिसका इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है। गंगोह में भी बुखार का प्रकोप बना हुआ है।
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मच्छरों को लेकर बेपरवाह हुआ नगर निगम
शहर से मच्छरों का खात्मा करने की बड़ी जिम्मेदारी नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग की है। बरसात से पहले नगर निगम शहर भर के नाले और नालियों की सफाई कराता है। नालियों में एंटी लार्वा का छिड़काव कराता है। साथ ही फॉगिंग कराता है। मगर इस बार शहर में नाले और नालियों की सफाई नहीं कराई गई है, जिसकी वजह से एंटी लार्वा का छिड़काव भी ठीक से नहीं हो सका है। इसके अलावा इस बार फॉगिग भी नहीं कराई गई है। केवल कुछ खास इलाकों में ही फॉगिंग हुई है। मलिन बस्तियों और शहर में शामिल हुए 32 गांवों की पिछले कई साल से लगातार अनदेखी की जा रही है। समाचार प्रकाशित होने के बाद गांव शिमलाना में चिकित्सा विभाग की टीम पहुंची थी। टीम ने 152 लोगों के खून के नमूने लेकर जांच को भेजे थे, जिनमें से 30 लोगों को बुखार की पुष्टि हुई है। मगर इसे प्रकोप नहीं कह सकते हैं। गत वर्षों की तुलना में इस बार कम मरीज हैं। यदि किसी गांव या ब्लॉक में बुखार फैलने जैसी बात है तो चिकित्सा विभाग तुरंत कदम उठाएगा।
- डॉ. शिवांका गौड़, जिला मलेरिया अधिकारी।
नगर निगम ने मच्छरों के खात्मे के लिए इस बार भी सभी प्रयास किए हैं। फॉगिंग के लिए रोस्टर बना हुआ है और लगातार फॉगिंग कराई जा रही है। यदि किसी कॉलोनी या क्षेत्र में फॉगिंग नहीं हुई है तो वह इसकी जानकारी विभाग को दे। हम टीम भेजकर फॉगिंग कराएंगे।
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- डॉ. गीताराम, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
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