सहारनपुर। नगर निगम के करोड़ों रुपये की कीमत के सरकारी आवासों पर वर्षों से कब्जे हैं। मगर नगर निगम के अधिकारी आवासों को कब्जामुक्त कराने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। पिछले दिनों चले अभियान में कुछ ही आवासों को खाली कराकर अभियान बंद कर दिया गया। नतीजा यह है कि नगर निगम के कर्मचारियों को रहने को सरकारी आवास नहीं मिल रहे हैं।
आवासों पर हुए अवैध कब्जों का मामला नगर निगम बोर्ड की बैठकों में भी उठ चुका है। कुछ दिन पहले भी कुछ पार्षदों ने आवासों को कब्जामुक्त कराने की मांग की थी। नगर निगम सूत्रों ने बताया कि म्यूनिसिपल कॉलोनी में वर्षों पहले 44 सरकारी आवास बनाए गए थे, जो कर्मचारियों केे आवंटित होने थे, मगर बाद में यह आवास लोगों केे आवंटित कर दिए गए। मगर ज्यादातर लोगों ने किस्तें नहीं दीं, जिसकी वजह से इन आवासों को खाली कराने की प्रक्रिया कई साल से चल रही है। मगर नगर निगम आज तक एक भी आवास खाली नहीं करा सका है। खाताखेड़ी में नगर निगम के आठ सरकारी आवास हैं। सूत्रों के अनुसार इन आवासों पर रिटायर्ड लोगों और बाहरी लोगों का कब्जा है। पता होने के बावजूद नगर निगम आज तक ठोस कदम नहीं उठा सका है। खलासी लाइन क्षेत्र में नगर निगम के कई सरकारी आवासों पर वर्षों से कब्जा चला आ रहा है। इन आवासों को भी खाली कराने की जहमत आज तक नहीं उठाई गई है। इसी प्रकार मल्हीपुर रोड पर भी नगर निगम का भवन है, जिसे आज तक नगर निगम ने अपने कब्जे में नहीं लिया है। हालांकि करीब छह महीने पहले नगर निगम ने अपने सरकारी आवासों को कब्जामुक्त कराने के लिए अभियान छेड़ा था। गांधी पार्क के आसपास दो आवासों को खाली कराया गया था। मगर उसके बाद अभियान को बंद कर दिया गया। ऐसे में नगर निगम के संबंधित अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
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म्यूनिसिपल कॉलोनी में आवासों पर हुए कब्जों के मामले में नगर निगम कागजी कार्रवाई कर रहा है। खाताखेड़ी और अन्य जगहों के आवासों पर भी हमारी पैनी नजर है। जल्द ही अधिकारियों के निर्देश पर अभियान चलाकर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
--विनय कुमार शर्मा, संपत्ति अधिकारी, नगर निगम।