सहारनपुर। नगर निगम प्रत्येक वर्ष बरसात से पहले शहर के नालों और नालियों की सफाई कराने का दावा करता है, जिस पर प्रत्येक वर्ष 50 से 60 लाख रुपये का खर्च दिखाया जाता है। नालों और नालियों की सफाई की हकीकत जानने के लिए अमर उजाला की टीम बुधवार को शहर के कई क्षेत्रों में गई। कई नाले ऐसे दिखे, जिनकी वर्षों से सफाई ही नहीं हुई।
नगर निगम में चार बड़े नालों के साथ ही 120 से अधिक छोटे नाले हैं। बरसात के दिनों में जलभराव की समस्या न हो, साथ ही मच्छर आदि पैदा न हों। इसके लिए नालों की सफाई के लिए प्रत्येक वर्ष 50 से 60 लाख रुपये का बजट रखा जाता है। निगम अधिकारियों की मानें तो नगर निगम प्रत्येक वर्ष नालों की सफाई कराता है। चार बड़े नालों की सफाई मशीनों के द्वारा तथा शेष नालों की सफाई मजदूर लगाकर की जाती है। हालांकि हकीकत इससे अलग है। अमर उजाला की टीम बुधवार को सबसे पहले चिलकाना रोड पर पहुंची। यहां मुन्नालाल कॉलेज के सामने से होकर गुजरने वाले बड़े नाले की हालत नालों की सफाई व्यवस्था की पोल खोल रही थी। नाला पॉलिथीन और कचरे से भरा नजर आया। नाले में भरे कचरे की हालत ऐसी है, कि कोई भी व्यक्ति नाले में उतरकर ऊपर खड़ा हो सकता है। स्थानीय निवासी मुसर्रफ, साजिद और वसीम अहमद ने बताया कि उन्हें ढंग से याद नहीं है कि नाले की सफाई कब हुई थी। उन्होंने नगर निगम पर क्षेत्र की अनदेखी करने का आरोप लगाया। आरोप लगाया कि क्षेत्र की सफाई व्यवस्था भी ठीक नहीं है। दिन भर कचरा सड़कों पर फैला रहता है। पुराना कलसिया रोड पर कई कॉलोनियां हैं, मगर पक्का नाला नहीं है। सड़क किनारे कच्चे नाले में पॉलिथीन और कचरा भरे होने की वजह से जलभराव रहता है। मातागढ़ में टंकी की साइड बना छोटा नाला जगह-जगह से ध्वस्त है, जिसकी ईंटें टूटकर नाले में ही भरी हैं। दालमंडी पुल पर नदी के दूसरी साइड में बना छोटा नाला पॉलिथीन से भरा हुआ है। सफाई न होने की वजह से हल्की सी बारिश में जलभराव हो जाता है। मंडी समिति रोड के साथ-साथ बने नाले की सफाई लंबे समय से नहीं हुई है। इसकी वजह से इसमें कचरा जमा है, जिसकी वजह से दुर्गंध रहती है। जैन कॉलेज रोड के दोनों ओर बने छोटे नालों की जिला पंचायत के सामने कभी सफाई नहीं हुई है। पुलिस लाइन के गेट के सामने एक नाले में पॉलिथीन और कचरा जमा है। इस प्रकार तमाम नालों की हालत खराब है।
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नालों की सफाई के ठेके निरस्त
इस बार नालों की सफाई के लिए दिए गए ठेकों में गड़बड़ी होने की शिकायत कमिश्नर से की गई थी। जिसकी वजह से कमिश्नर ने ठेकों को निरस्त करने के निर्देश नगर निगम को दिए थे। कमिश्नर के निर्देश पर नालों की सफाई से जुड़े दस ठेकों को निरस्त किया गया था। यही वजह है कि इस बार बरसात से पहले नालों की सफाई नहीं हो सकी है।
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नाले और नालियों की सफाई प्रत्येक वर्ष कराई जाती है, जिस पर करीब 50 लाख रुपये खर्च किया जाता है। पिछले तीन साल में नालों की सफाई हुई या नहीं इसका मुझे मालूम नहीं है, मगर इस बार नालों की सफाई के ठेके निरस्त कर दिए जाने की वजह से नालों की सफाई नहीं हो सकी है।
डॉ. एके त्रिपाठी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।