छुटमलपुर (सहारनपुर)। बच्चों को लेकर स्कूल जा रही ट्रैक्टर ट्राली मंगलवार की सुबह भैंसा बुग्गी को बचाने के प्रयास में रास्ते से उतर कर तिरछी हो गई। इससे उसमें सवार बच्चे भी एक दूसरे के ऊपर जा गिरे और उनमें चीख पुकार मच गई। गनीमत रही कि ट्राली पलटी नहीं वरना बड़ा हादसा हो सकता था। राहगीरों ने किसी तरह बच्चों को बाहर निकाला। इसके बाद बच्चे स्कूल जाने के बजाए अपने घरों को लौट गए। घटना के दौरान अभिभावकों में भी हड़कंप मचा रहा। बच्चों के सुरक्षित मिलने पर ही उन्होंने राहत की सांस ली।
कोतवाली देहात के गांव लखनौती के गोल्डन फ्यूचर एकेडमी द्वारा गांवों से बच्चों को लाने ले जाने के लिए ट्रैक्टर ट्राली का इस्तेमाल किया जाता है। सुबह साढ़े सात बजे स्कूल की ट्रैक्टर ट्राली में सवार करीब 15 बच्चें गांव अल्हेड़ी से चले थे। जैसे ही ये दतौली और अल्हेड़ी के बीच मुनफैद के खेत के पास पहुंचे तो सामने से आ रही भैंसा बुग्गी को बचाने के प्रयास में चालक ट्रैक्टर पर नियंत्रण खो बैठा और ट्राली सड़क किनारे उतर कर तिरछी हो गई। इससे बच्चे एक दूसरे के ऊपर जा गिरे। उनमें चीख पुकार मच गई। राह चलते लोगों ने आनन फानन में बच्चों को नीचे उतारा। इसके बाद उन्हें पैदल ही गांव की तरफ रवाना किया गया।
बच्चों के आवागमन के लिए ट्रैक्टर ट्राली का इस्तेमाल कर उनकी जान जोखिम में डालने के सवाल पर स्कूल प्रबंधक विपिन धीमान का कहना था कि गांव में गरीब अभिभावकों द्वारा बस का किराया न दे पाने की स्थिति में उसने ट्रैक्टर ट्राली को स्कूली वाहन के रूप में परिवर्तित कर दिया था। वह अब इसे बदल कर बस ले लेंगे। उधर इस संबंध में आरटीओ प्रवर्तन लक्ष्मीकांत मिश्रा एवं प्रशासन कपिल देव सिंह का कहना था कि मामला गंभीर है और उनकी जानकारी में आया है। ट्रैक्टर ट्राली को तो बड़ों को लाने ले जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती फिर बच्चों को ले जाने के लिए उपयोग करना तो उनकी जान जोखिम में डालना है। वे उक्त ट्रैक्टर ट्राली को सीज कराने के साथ ही ऐसे अन्य वाहनों के खिलाफ भी अभियान चला कर कार्रवाई करेंगे तो लोगों की जान के लिए खतरा बने हैं।