आर्य समाज के वार्षिकोत्सव में
राष्ट्रधर्म अपनाने का आह्वान
अमर उजाला ब्यूरो
गंगोह। आर्य समाज के 133वें वार्षिकोत्सव के समापन पर आर्य विद्वानों ने राष्ट्र रक्षा और राष्ट्र भक्ति का संदेश देते हुए कहा कि यदि देश के राजनेता राष्ट्रधर्म को धारण कर लें तो देश के दुश्मन कभी राष्ट्र का अहित नहीं कर सकते।
कार्यक्रम में आचार्य ओमप्रकाश ने कहा कि राष्ट्र रक्षा, एकता एवं अखंडता के लिए सभी राजनेताओं को एकजुट रहना होगा। कहा कि देश के सभी राजनेताओं के देशभक्त होने पर ही कश्मीर एवं अन्य राज्यों से आतंकवाद और नक्सलवाद खत्म हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसा वेद के विचारों पर चलकर ही संभव है। आचार्य शिवदत्त पांडेय सुल्तानपुरी ने कहा कि राजधर्म और राजनीति में अंतर है। राजधर्म में योगीराज श्रीकृष्ण ने रथ का पहिया निकालकर युद्ध के लिए चक्र बनाया। राजनीति में राजनेता अपना उल्लू सीधा करते हैं। चाहे देश का कुछ भी हो जाए। कहा कि जिस देश के राजनेताओं में द्वंद्व होता है। वह देश सुरक्षित नहीं होगा।
भजनोपदेशक पंडित ऋषिपाल ओलरा और पंडित भीष्म आर्य ने भजनों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया। आर्य प्रचारक डा. वीर सिंह भावुक, जगपाल सिंह, ताराचंद, रमेश आर्य, देवेंद्र आर्य, अवनीश आर्य, विकास आर्य, सोमपाल, ऋषिपाल, सुरेंद्र आर्य, अनिल आर्य, सुदेश प्रभा, मधु आर्या, श्रुति आर्या आदि रहे।