देवबंद (सहारनपुर)। हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिस द्वारा किरतपुर के शाह अलीपुर गांव में धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर उतरवाए जाने के मामले में देवबंदी उलमा का कहना है कि ये सही नहीं है। कोर्ट को लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
बृहस्पतिवार को ऑल इंडिया तंजीम उलमा-ए-हिंद के प्रदेशाध्यक्ष मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश पर स्थानीय प्रशासन द्वारा मंदिर और मस्जिद से लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई सही नहीं है। कोर्ट और प्रशासन को लोगों की धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि अजान देने का वक्त तीन से चार मिनट का होता है और इसका मकसद नमाजियों को मस्जिद में बुलाना होता है। इसी प्रकार मंदिर में लाउडस्पीकर बजाने का उद्देश्य लोगों को पूजा पाठ के समय की जानकारी देना है। मौलाना वाजदी ने यह भी कहा कि बहुत तेज आवाज में इनको नहीं बजाना चाहिए, क्योंकि इससे लोगों को परेशानी होती है। इसलिए मस्जिद और मंदिर प्रबंधन को इस पर ध्यान देकर कम आवाज में इनको बजाना चाहिए। मदरसा जामिया हुसैनिया के उस्ताद मुफ्ती तारिक का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों पर किसी भी तरह की सियासत नहीं होनी चाहिए। लाउडस्पीकर केवल लोगों को इबादत के लिए समय बताने का माध्यम है। इसलिए धार्मिक मसलों में किसी को भी दखलंदाजी नहीं करनी चाहिए।