सहारनपुर। नगर निगम, नगर पंचायत और नगर पालिकाओं में सरकारें बन चुकी हैं। जनपद में नगर निगम के साथ ही छह नगर पंचायतें हैं, जिनमें रामपुर मनिहारान, नानौता, बेहट, तीतरों, अंबेहटा पीर और सुल्तानपुर चिलकाना शामिल हैं। इसके अलावा चार नगर पालिकाएं हैं। इनमें गंगोह, देवबंद, सरसावा और नकुड़ शामिल हैं। एक ओर जहां नव निर्वाचित महापौर और चेयरमैन अभी तक जीत के जश्न में डूबे हुए हैं, वहीं जनापेक्षाओं पर खरा उतरने की चुनौती भी उनके सिर पर है। तब चुनौती और बढ़ जाती है, जब आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया या उससे अधिक की स्थिति हो। ज्यादातर नगर पंचायतों और पालिकाओं के पास बजट की समस्या है। कमाई इतनी है नहीं, जितनी अव्यवस्थाएं मुंह उठाए खड़ी हैं। एक तरह से कहें तो नई सरकारों को कंगाल निकाय मिले हैं।
महापौर को विरासत में मिली समस्याएं
अक्तूबर 2009 में नगर निगम बनने के बाद पहली बार मेयर चुनाव हुआ है। निगम बनने के बावजूद बहुत से काम पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं। कचरा प्रबंधन की व्यवस्था करना, शेष 70 से 80 फीसदी क्षेत्र में सीवर लाइन बिछाना, शेष 75 फीसदी आबादी को शुद्ध पेयजल मुहैया कराना, शहर को अतिक्रमणमुक्त कराना, रिंग रोड बनवाना, बस अड्डों को शहर से बाहर कराना, सड़कों का चौड़ीकरण कराना, कई जगहों पर उपरिगामी पथ और अंडरपास की जरूरत है, जिनको निर्माण कराना, नालों और नालियों को दुरुस्त बनाना प्रथम महापौर संजीव वालिया और 70 पार्षदों के सामने बड़ी चुनौती रहेंगे। नगर निगम की कमाई की बात करें तो निगम की कमाई का सबसे बड़ा जरिया हाउस टैक्स है। इसके बाद दुकानों और अन्य भवनों का किराया, जल कर समेत अन्य श्रोत हैं। मैन पावर यानी सफाईकर्मी समेत अनेक विभागों में कर्मचारियों की भारी कमी है। निगम बनने के दौरान शहर से जोड़े गए 32 गांवों में नगर निगम के विकास का पहिया अभी तक नहीं पहुंचा है। इन गांवों को भी मुख्य धारा से जोड़ा जाना है। ऐसे में महापौर के सामने आमदनी कम और खर्च अधिक होने की स्थिति है।
विकास कार्यों के साथ ही पुराना बकाया चुकाने की चुनौती
नगर पालिका गंगोह में हुए विकास कार्यों के ठेकेदारों के बिल और समाचार पत्रों में दिए गए विज्ञापनों के लाखों के बिल बकाया हैं, जबकि पालिका के पास फिलहाल कोई बजट नहीं है। ईओ कृष्ण मुरारी ने बजट के बारे में किसी तरह की जानकारी होने से इनकार किया है। प्रधान लिपिक किरणपाल ने बताया कि शासन से हर महीने बजट मांगा जाता है। बजट आने पर काम कराए जाते हैं। गंदगी और अतिक्रमण बड़ी समस्या है, जिसे लेकर लोग परेशान हैं। इसके अलावा अनेक इलाकों में जलभराव रहता है, जिसमें पलने वाले मच्छर बीमारियां फैला रहे हैं। यहां रुशदा बेगम पालिका अध्यक्ष चुनी गई हैं, जिनके सामने सीमित आमदनी में काम चलाना होगा। उनकी कार्यप्रणाली शासन से मिलने वाले बजट पर निर्भर करेगी।
श्मशान घाट और तालाब का सुंदरीकरण अधूरा
नकुड़ नगर पालिका के खाते में दो करोड़ 15 लाख रुपये से अधिक का बजट बचा है। इसके बावजूद क्षेत्र में समस्याओं की कमी नहीं है। श्मशान घाट और ढाबे वाले तालाब के सुंदरीकरण का कार्य अधर में लटका हुआ है। श्मशान घाट के सुंदरीकरण के लिए एक करोड़ 34 लाख रुपये का टेंडर हुआ था, मगर कुछ समय बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने ठेकेदार पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए हंगामा कर काम रुकवा दिया था। जिलाधिकारी के स्तर से जांच कराई जा रही है। नगर से निकलने वाले कूड़े के निस्तारण की भी कोई व्यवस्था आज तक नहीं हो सकी है। नगर में पचास से अधिक सरकारी हैंडपंप रिबोर होने हैं। सड़कें और नालियां जर्जर हो चुकी हैं। कुछ इलाकों में बरसात में जलभराव की समस्या रहती है। अतिक्रमण भी एक समस्या है। नव निर्वाचित चेयरमैन शाहनवाज खान के सामने समस्याओं से पार पाना चुनौती रहेगा।
बस स्टैंड और सार्वजनिक शौचालयों की दरकार
सरसावा नगर पालिका क्षेत्र में निवर्तमान पालिकाध्यक्षा द्वारा करोड़ों रुपये विकास कार्यों में खर्च करने के बाद भी नगर में विकास नजर नहीं आ रहा है। आलम यह है कि अनेक ज्वलंत समस्याओं का समाधान जनता शीघ्र चाहती है। नगर में वर्षों से अम्बाला रोड पर यात्री सुविधा के लिए एक बस स्टैंड की मांग होती रही है। कई जगह जलभराव की समस्या है। बाजारो में फैला स्थायी तथा अस्थायी अतिक्रमण भी नागरिकों के लिये कोढ़ बना हुआ है। बाजारों में एक भी शौचालय न होना भी एक समस्या है। पालिका के अधिशासी अधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि पालिका के पास राज्य वित्त आयोग, चौदहवें वित्त आयोग, नगर पालिका फंड आदि में करीब सवा करोड़ रुपये का फंड बचा हुआ है। नए अध्यक्ष बिजेंद्र मोंगा के लिए जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती है।
देवबंद में मुंह उठाए खड़ी हैं समस्याएं
नगर पालिका देवबंद में शहर ही की तरह समस्याएं मुंह उठाए खड़ी हैं, जिनका निस्तारण जनता हर हाल में चाहती है। नव निर्वाचित पालिका अध्यक्ष जियाउद्दीन के सामने जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती है। गृह कर, जल कर पालिका की कमाई के मुख्य श्रोत हैं। बड़ा क्षेत्र होने की वजह से शासन से मिलने वाले बजट पर काफी कुछ निर्भर रहता है। गंदगी, टूटी सड़कें और नालियां, स्ट्रीट लाइट, कचरे का निस्तारण अध्यक्ष के सामने बड़ी चुनौती बनने वाला है। बाजारों में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराए जाने की सख्त जरूरत है।
कचरा और अतिक्रमण है चिलकाना की बड़ी समस्या
नगर पंचायत सुल्तानपुर-चिलकाना में गंदगी सबसे बड़ी समस्या है, जिससे जनता निजात चाहती है। नव निर्वाचित चेयरमैन अकबर कुरैशी के सामने कस्बे में सफाई व्यवस्था बनाना ही सबसे बड़ी चुनौती है। नगर पंचायत में करीब 35 सफाईकर्मी रखे हुए हैं, लेकिन मुख्य सडकों को छोड़कर छोटे मार्गों तथा गलियों की नियमित सफाई नहीं हो पाती है। सड़क तथा नालियों से निकला कूड़ा भी समय से उठाना एक चुनौती हो सकता है। बाईपास रोड स्थित मोहल्लों में जलभराव की समस्या रहती है। कस्बे में उचित जगह पर बस स्टैंड न होने से बसें कस्बे के बीच में सरसावा-सहारनपुर-शाहजहांपुर रोड पर ही खड़ी होती हैं। यहां अतिक्रमण की समस्या से लोग परेशान हैं। गृह कर और जल कर पंचायत की कमाई के मुख्य श्रोत हैं। ऐसे में यहां शासन से मिलने वाले बजट पर ही तमाम विकास कार्य निर्भर रहते हैं।
रामपुर में बस स्टैंड न होने से लोग परेशान
नगर पंचायत रामपुर मनिहारान में समस्याओं का अंबार है। दक्षिण छोर पर बाईपास का काम अधूरा है। आज तक बस स्टैंड नहीं बन सका है। इसकी वजह से बस संचालक जहां चाहें बसे रोकते हैं, जिसकी वजह से व्यापारियों को परेशानी रहती है। पार्कों और बाजार में कोई सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से केंद्र सरकार का स्वच्छ भारत मिशन यहां बेमाना साबित हो रहा है। तहसील होते हुए भी तहसील कार्यालय अस्थाई बिल्डिंग में चल रहा है। कूड़ा निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं है। पूर्व पंचायत अध्यक्ष पंचायत के खाते में 14वें वित्त आयोग के तहत 52 लाख रुपये छोड़े हैं। पंचायत की आय के प्रमुख श्रोत गृह कर, जल कर और दुकानों का किराया है। शासन से मिलने वाले बजट पर भी ज्यादातर काम निर्भर रहते हैं। नव निर्वाचित पंचायत अध्यक्ष शकुंतला देवी को स्थाई समस्याओं से पार पाकर नई इबारत लिखनी होगी।
गंदगी और अतिक्रमण का सफाया चाहती है जनता
नगर पंचायत अंबेहटा में मुख्य बाजार में अतिक्रमण, गंदगी, टूटी सड़कें और नालियां दुरुस्त न होना बड़ी समस्याएं हैं। यहां नव निर्वाचित पंचायत अध्यक्ष गुलशाना ने विकास के नाम पर वोट प्राप्त किए हैं। मगर बजट की कमी उनकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा रहेगी। पंचायत की कमाई के मुख्य श्रोत गृह कर, जलकर और ठेके हैं। मगर ज्यादातर लोग इन करों को भी नहीं चुका पा रहे हैं। जिसकी वजह से आमदनी पूरी नहीं हो पाती है। 14वें वित्त आयोग के करीब 25 लाख रुपये बकाया हैं। सीमित संसाधनों और बजट के अभाव में पंचायत को तमाम सुविधाएं मुहैया कराना पंचायत अध्यक्ष के सामने चुनौती रहेगा।
शासन से मिलने वाले बजट पर निर्भर है विकास
नानौता नगर पंचायत में भी गंदगी और अतिक्रमण प्रमुख समस्याएं हैं। गलियों की सड़कें जर्जर हैं। यहां भी पंचायत की कमाई का मुख्य जरिया गृह और जलकर है। शासन से मिलने वाले बजट पर पंचायत के तमाम काम निर्भर रहते हैं। नव निर्वाचित पंचायत अध्यक्ष नसीम फात्मा को संभलकर काम करना होगा।
सड़क और शौचालय की उठ रही मांग
बेहट में शुद्घ पेयजल की व्यवस्था करना, सड़कों को दुरुस्त बनाना तथा सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराना जरूरी है। शौचालयों की कमी की वजह से अनेक लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। यहां की जनता से इस बार निर्दलीय अब्दुल रहमान को पंचायत का अध्यक्ष चुना है। ऐसे में नए अध्यक्ष के सामने पुराने दलधारी अध्यक्षों से बेहतर काम करने की चुनौती रहेगी। गृह और जलकर से कोई खास कमाई यहां नहीं है। ऐसे में शासन से मिलने वाले बजट पर निर्भर है।
कचरा और अतिक्रमण बना समस्या
तीतरों नगर पंचायत में भी अतिक्रमण, गंदगी और सार्वजनिक शौचालय न होना लोगों की प्रमुख समस्याएं हैं। पंचायत का विकास शासन से जारी बजट पर निर्भर करता है, क्योंकि पंचायत की अपनी इतनी कमाई नहीं है, जिससे वह जनता की जरूरतों को पूरा कर सके। ऐसे में नव निर्वाचित अध्यक्ष मनोज कुमार के सामने जन अपेक्षाओं की पूर्ति करना चुनौती बनने वाला है।