सहारनपुर। नानौता सहकारी शुगर मिल की जांच में गत वर्ष आंकड़ों में हेरफेर का अनियमितता करने का मामला सामने आया है। जिला गन्ना अधिकारी द्वारा की गई जांच रिपोर्ट में साफ बताया गया कि मिल के तत्कालीन प्रधान प्रबंधक विनोद कुमार और मुख्य गन्ना अधिकारी रामस्नेही द्वारा जानबूझकर मिल बंदी की सूचना 30 अप्रैल 2017 घोषित की गई जबकि मिल के विभिन्न क्रय केंद्रों पर गन्ना खरीद 5 मई तक की गई। जाहिर है कि मिल प्रबंधन ने गन्ना खरीद, प्राप्ति और गन्ना पेराई आदि के आंकड़ों में हेरफेर कर मिल बंदी की वास्तविक तिथि और समय को छिपाया गया है। जांच रिपोर्ट को कार्रवाई के लिए गन्ना आयुक्त को भेज दिया गया है। हालांकि मिल के तत्कालीन सीसीओ ने इसे लिपकीय त्रुटि करार दिया है।
किसान नेता राकेश गुर्जर द्वारा की गई शिकायत के आधार पर जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी ने नानौता मिल की जांच की। जांच रिपोर्ट में डीसीओ ने बताया कि गत सीजन में मिल के प्रधान प्रबंधक और सीसीओ ने मिल बंदी की सूचना गलत दी गई थी। उन्होंने 30 अप्रैल को मिल बंदी करने की सूचना दी जबकि मिल के क्रय केंद्रों पर 5 मई तक गन्ना खरीद की गई। हालांकि मिल के सीसीओ ने जांचकर्ता को बताया कि मिल बंदी का नोटिस 30 अप्रैल को जारी किया गया था, लेकिन स्थानीय विधायक प्रदीप चौधरी और कृषकों ने बताया था कि अभी क्षेत्र में गन्ना खेतों में खड़ा है। इसलिए मिल ने निर्णय लिया कि अवशेष गन्ने को मिल के प्रॉसेस चलते हुए खरीद लिया जाए। इसलिए मिल में गन्ना दो मई की रात 2.55 तक आता रहा, जिससे पेराई कार्य चलता रहा। डीसीओ ने जांच रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि इस पूरे प्रकरण में किसी कृषक को कोई आर्थिक हानि नहीं हुई है, लेकिन इस अनियमितता में तत्कालीन मुख्य गन्ना अधिकारी और संबंधित तौल लिपिकों की संलिप्तता सामने आई है। प्रधान प्रबंधक ने भी अपने दायित्वों की सही प्रकार से निर्वहन नहीं किया गया है। जिला गन्ना अधिकारी ने बताया कि उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट को उप गन्ना आयुक्त को सौंप दिया है। उप गन्ना आयुक्त दिनेश्वर मिश्र ने बताया कि डीसीओ द्वारा नानौता शुगर मिल की जांच रिपोर्ट को केन कमिश्नर को कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है। इस पूरे मामले में किसान का तो कोई नुकसान सामने नहीं आया है। लेकिन आंकड़ों में हेराफेरी करने की अनियमितता सामने आई है।