सहारनपुर के देवबंद में देवबंद युवा पंजाबी क्लब ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्रों में वर्ष 1991 में पीलीभीत में फर्जी पुलिस मुठभेड़ में 11 सिखों को मारने वाले तत्कालीन डीआईजी और एसएसपी समेत अन्य पुलिस अधिकारियों को सजा दिलाने की मांग की गई। प्रतिलिपि केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी भेजी गई हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में युवा पंजाबी क्लब के सदस्यों ने कहा कि वर्ष 1991 में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान नानकमता से तीर्थ यात्रा कर लौट रही सिख तीर्थ यात्रियों की बस को उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों ने पीलीभीत में रुकवा कर उसमें से 11 सिख युवकों को उतरवा लिया था,
जिन्हें आतंकवादी बताकर उन निर्दोषों को फर्जी मुठभेड़ में मौत के घाट उतार दिया गया। 25 साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद सीबीआई की अदालत ने 47 पुलिसकर्मियों को इस हत्याकांड का दोषी पाया है।
लेकिन, उनका आरोप है कि फर्जी मुठभेड़ का खाका तैयार करने वाले उस समय के पीलीभीत के तत्कालीन डीआईजी व एसएसपी आरडी त्रिपाठी साफ बच गए। जबकि, पूरी फर्जी मुठभेड़ की कहानी इन्हीं अधिकारियों के इशारे पर तैयार की गई थी। पत्र भेजने वालों में क्लब अध्यक्ष गुरजोत सिंह सेठी, पालिका सभासद बालेंद्र सिंह, अंशुल गाबा, विकास अरोड़ा, बाबा सिंह, राजपाल नारंग, राजन छाबड़ा, गुरदीप सिंह सोढी, गुरविंदर छाबड़ा आदि मौजूद रहे।