मां-बाप की बात ना मानने वालों की दुआ कबूल नहीं करते अल्लाह
सहारनपुर। जमीयत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक व इमाम कारी इसहाक गोरा ने हेल्पलाइन के जरिए शरीयत की रोशनी में रोजेदारों की शंकाओं का समाधान किया गया। इसहाक गोरा ने कहा कि शराब पीने या पिलाने, मां-बाप की बात ना मानने, रिश्तेदारों से नाता तोड़ने और हसद-कीना रखने वाले लोगों की अल्लाह दुआ कबूल नहीं करते हैं। इसीलिए हर गुनाह से अल्लाह की बारगाह में दुआ करें और हर गलत कार्यों को छोड़ने की ऐहेद लें। क्योंकि, गलत कार्यों को हमेशा के लिए छोड़ देने का नाम भी रमजान है।
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सवाल:- मल्हीपुर निवासी मुनीर ने मालूम किया कि हमें आपके जरिए पता चला कि रोजे की हालत में टूथपेस्ट करना सही नहीं है, लेकिन क्या रोजे की हालत में हम मिसवाक (दातुन) कर सकते हैं। इससे रोजे पर कोई असर तो नहीं आएगा।
जवाब:- दातून बिल्कुल कर सकते हैं। हदीस की एक रिवायत में पैगंबर मोहम्मद साहब ने फरमाया है कि रोजेदार की बेहतरीन मिसवाक करना है। यदि रोजेदार अगर सुन्नत समझ कर करें तो इसमें और सवाब भी है।
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सवाल:- शहीदगंज निवासी सुबुही ने पूछा कि मैंने रोजे की हालत में आंखों में दवा डाली, उसका असर थूक में और नाक में महसूस हुआ। ऐसी सूरत में अब रोजा रहा या नहीं।
जवाब:- शरीयत में आया है कि आंखों में दवा डालने से रोजा नहीं टूटता। अगर दवा डालने का असर थूक या नाक में हो रहा तो भी रोजा नहीं टूटेगा।
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सवाल:- पठानपुरा निवासी अजरा सुल्ताना ने पूछा कि मेरे पास जेवरात है, जिसकी मालिक मैं हूं, लेकिन हाउस वाइफ हूं। कमाई का जरिया मेरे पति हैं। अब ऐसी सूरत में उसकी जकात मुझ पर फर्ज होती है या मेरे पति जकात अदा करेंगे। इस पर शरीयत का क्या हुक्म है।
जवाब:- यदि किसी महिला के पास हैसियत के बराबर जेवरात हों या नगदी रुपये हों तो उसको जकात अपने पास से अदा करनी चाहिए। पति के जिम्मे उसकी जकात अदा करना जरूरी नहीं है। यदि उस महिला के पास पैसे नहीं हैं, तो जेवरात बेचे, लेकिन जकात जरूर अदा करें और हां यदि पति-पत्नी की ओर से दे दे या पत्नी अपने पति से लेकर दे दे तो जकात अदा हो जाएगी।