बेहट। सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी स्थित शंकराचार्य आश्रम के प्रभारी भैरव तंत्राचार्य संत सहजानंद ब्रहमचारी ने बताया कि नवरात्रि एक हिंदू पर्व है। नवरात्रि में महालक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं। दुर्गा का अर्थ जीवन के दुख को हटाने वाली होता है।
नौ देवियों के बारे में शास्त्रों में भी वर्णित है। शैलपुत्री अर्थार्थ पहाड़ों की पुत्री, ब्रह्मचारिणी अर्थात ब्रम्हचारिणी, चंद्रघंटा अर्थार्थ चांद की तरह चमकने वाली, कुष्मांडा अर्थार्थ संपूर्ण जगत उनके पैरों में, स्कंदमाता कार्तिक स्वामी की माता, कात्यायनी अर्थात कात्यान आश्रम में जन्म लेने वाली, कालरात्रि अर्थात कॉल का नाश करने वाली, महागौरी अर्थार्थ सफेद रंग वाली मां, सिद्धिदात्री अर्थात सर्व सिद्धि देने वाली होता है। उन्होंने बताया कि नव दुर्गा और दस महाविद्याओं में काली ही प्रथम है। भगवान शिव की शक्तियों में उग्र और सौम्य दो रूपों में अनेक रूप धारण करने वाली दस महाविद्या अनंत सिद्धियां प्रदान करने में समर्थ हैं। दसवें स्थान पर कमला वैष्णवी शक्ति है, जो प्राकृतिक संपत्तियों की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी है। देवता ,मानव, दानव सभी इनकी कृपा के बिना पंगु है। इसलिए आगम-निगम दोनों में इनकी उपासना समान रूप से वर्णित है।
संत सहजानंद ब्रह्मचारी ने बताया कि सिद्ध पीठ शंकराचार्य आश्रम में चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर शतचंडी महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। यज्ञ का उद्देश्य विश्व कल्याण एवं क्षेत्र की शांति है। उन्होंने बताया कि अष्टमी को पूर्णाहुति, भंडारा एवं संत महासम्मेलन होगा।