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ए श्रेणी के रेलवे स्टेशन पर बुनियादी सुविधाओं का टोटा

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सहारनपुर। ए श्रेणी का रेलवे जंक्शन सहारनपुर बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। स्टेशन पर न तो पेयजल की ही व्यवस्था है और न ही स्टेशन पर यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था है। रेलवे यात्रियों को प्लेटफार्म पर जमीन में ही बैठकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ रहा है।
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सहारनपुर रेलवे स्टेशन ए श्रेणी का रेलवे स्टेशन है, लेकिन यहां यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाओं का भारी टोटा है। सहारनपुर रेलवे स्टेशन पर पेयजल की व्यवस्था तक नहीं हैं। गर्मियां की दस्तक हो चुकी है। रेलवे स्टेशन पर शुद्ध पेयजल के लिए लगाई गई मशीन एक दो माह चलने के बाद ही बंद हो गई। जबकि प्लेटफार्म पर पानी की अन्य कोई व्यवस्था नहीं है। प्लेटफार्म नंबर 4 पर लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन लगभग पांच दर्जन से अधिक ट्रेनें गुजरतीं हैं और लगभग 28 हजार यात्रियों का आवगमन होता है। यात्रियों की इतनी संख्या के बावजूद रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। प्लेटफार्म नंबर 1, 2, 3 और चार पर यात्रियों को जमीन पर ही बैठकर ट्रेन के इंतजार करना पड़ रहा है। दैनिक यात्रियों ने कई बार मूलभूत समस्याओं के निस्तारण की अधिकारियों से मांग की है। लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो सका है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि रेलवे प्लेटफार्म पर सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। कुछ सुविधाएं बढ़ाई जा रहीं हैं।

--। बुजुर्गों को एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पहुंचने में हो रही परेशानी
सहारनपुर रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर 5 और 6 पर जाने के लिए बुजुर्ग यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन प्लेटफार्मों पर पहुंचने के लिए बुजुर्गों को ऊंची सीढ़ियां चढ़नी पड़ रहीं हैं। जिनसे कई बार बुजुर्ग यात्रियों की तबियत भी खराब हो चुकी है। सहारनपुर रेलवे स्टेशन पर स्वचालित सीढ़ियों का निर्माण होना है। एक वर्ष से सामान भी स्टेशन पर रखा हुआ है। लेकिन ठेकेदार की लापरवाही एवं अधिकारियों की उदासीनता के चलते स्वचालित सीढियां तैयार नहीं हो सकीं हैं।
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खुले में बिक रही है खाद्य सामग्री
रेलवे प्लेटफार्मों पर खाद्य सामग्री खुले में ही बेची जा रही है। रेलवे प्लेटफार्म पर लगे स्टॉल एवं रेहड़ियां रेलवे लाइनों के पास ही स्थित है। लाइनों पर फैलने वाली गंदगी की मक्खियां खाद्य पदार्थों को दूषित कर रहीं हैं। लेकिन रेलवे में खाद्य सुरक्षा का कोई भी अधिकारी पिछले कई साल से आकर खाद्य पदार्थों की न तो सैंपलिंग कर रहा है और न ही जांच की जा रही है।
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