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हिंदू-मुस्लिम धर्मगुरु बोले, नया साल मनाना गलत

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देवबंद (सहारनपुर)। एक जनवरी पर नए साल की मुबारकबाद देना या जश्न मनाना सरासर गलत है। देवबंद के हिंदू और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अंग्रेजों का त्योहार है जिसे हिंदुस्तान में रहने वाले लोगों को नहीं मनाना चाहिए।
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पिछले कई दशकों से भारत में नए साल का आगाज विभिन्न तरीके से किया जाता है। जिसके लिए बड़े बड़े कार्यक्रमों के आयोजन भी किए जाते हैं, लेकिन नए साल को लेकर देवबंद के हिंदू-मुस्लिम धर्मगुरुओं का कहना है कि नया साल अंग्रेजों का त्योहार है इसलिए इसे नहीं मनाना चाहिए। श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा का कहना है कि हिंदू शास्त्रों में मार्च में प्रथम नवरात्र को हिंदू नव सत्र का आरंभ होता है। हमें उसी दिन नववर्ष मनाना चाहिए। पंडित सतेंद्र शर्मा ने कहा कि सरकारी तौर पर भी हमारे देश में इसी दिन से नववर्ष का आगाज होता है। कहा कि हमारे युवाओं को इस परंपरा की जानकारी होनी चाहिए और यह जिम्मेदारी अभिभावकों की बनती है कि वह अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति की जानकारी दें। ताकि हमारे बच्चे अंग्रेजों की परंपरा मनाने से बचें। पंडित सतेंद्र शर्मा ने कहा कि युवाओं को चाहिए कि वह 1 जनवरी को न तो एक दूसरे को नववर्ष की मुबारकबाद दें और न ही कोई जश्न मनाएं। मदरसा जामिया हुसैनिया के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती तारिक कासमी का कहना है कि इस्लाम में एक जनवरी पर नए साल की मुबारकबाद देना या फिर जश्न मनाना जायज नहीं है। इस्लाम में जन्मदिन मनाना या केक काटना भी नाजायज बताया गया है। इसलिए जो लोग इस्लाम धर्म से ताल्लुक रखते हैं उन्हें इस तरह की परंपराओं से परहेज रखना चाहिए। कहा कि इस्लाम धर्म में इस चीज की कतई इजाजत नहीं है। मुफ्ती तारिक ने कहा कि इस्लाम धर्म में नया वर्ष मोहर्रम माह से आरंभ होता है।
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