सहारनपुर। शेखुल हिंद मौलाना महमूदुल हसन मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। एमसीआई की टीम सितंबर 2017 में कॉलेज का दौरा कर लौटी थी। अव्यवस्थाओं को देखते हुए टीम ने खामियां दूर न किए जाने पर मान्यता खत्म करने की चेतावनी दी थी। टीम अब मार्च 2018 में पुन: आएगी। चूंकि कॉलेज में अव्यवस्थाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में कॉलेज की मान्यता बचे रहना
करीब आठ साल पहले तत्कालीन बसपा सरकार में अंबाला रोड पर राजकीय मेडिकल कॉलेज का निर्माण कराया गया था। इसके बाद प्रदेश में आई सपा की सरकार ने शेखुल हिन्दी मौलाना महमूदुल हसन के नाम से कॉलेज का नामकरण किया था। साथ ही ओपीडी भी शुरू कराई थी। मगर बाकी जरूरी संसाधन और मैन पावर कॉलेज को आज तक उपलब्ध नहीं हो सके हैं। कॉलेज अनेक तरह की अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। सितंबर 2017 में एमसीआई की टीम ने कॉलेज का दौरा किया था। टीम ने अनेक तरह की खामियां पाई थीं। टीम ने मार्च 2018 में पुन: कॉलेज का दौरा करने की बात कही थी। साथ ही मार्च तक खामियां दूर न होने पर कॉलेज की मान्यता खत्म करने की चेतावनी दी थी। मगर कॉलेज प्रशासन ने एमसीआई की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। प्रदेश में बनी योगी सरकार से कॉलेज के हालात सुधरने की उम्मीद थी, मगर ऐसा नहीं हुआ। मौजूदा हालात ऐसे हैं कि कॉलेज का केवल भवन ही शानदार है, जबकि संसाधनों और मैनपावर की भारी कमी है। स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
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सुविधाएं बढ़ें तो जनता को होगा बड़ा फायदा
मंडल मुख्यालय होने के बावजूद सहारनपुर में चिकित्सा सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है। गंभीर मरीजों केे बचाने के लिए चंडीगढ़, देहरादून, बराड़ा, मेरठ या फिर दिल्ली लेकर भागना पड़ता है। कई बार इलाज न मिलने की वजह से मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। मेडिकल कॉलेज की स्थापना के पीछे मकसद यही था कि यहां की जनता को इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े और गंभीर मरीजों को अपने ही शहर में इलाज मिल सके। यदि कॉलेज में सभी जरूरी सुविधाएं मिल जाएं तो सहारनपुर के मरीजों को इससे बड़ा लाभ होगा।
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मेडिकल के छात्रों की पढ़ाई बाधित
कॉलेज में फैकल्टी की भारी कमी है। एमसीआई की रिपोर्ट के अनुसार 36.84 फैकल्टी की जरूरत कॉलेज को है। इको करने के लिए मशीन है, मगर कार्डियोलॉजिस्ट नहीं है। डायलिसिस की व्यवस्था है, मगर नेफ्रोलॉजिस्ट नहीं है। सिटी स्कैन की कोई व्यवस्था नहीं है। वर्तमान में एमबीबीएस के करीब 300 छात्र यहां शिक्षा पा रहे हैं। आलम यह है कि फैकल्टी और संसाधन न होने की वजह से लगातार उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि बिना संसाधनों और फैकल्टी के पढ़ाई कर डॉक्टर बनने वाले युवा किस तरह का इलाज जनता को देंगे।
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कॉलेज के पास न प्राचार्य और न ही पर्याप्त स्टाफ
मेडिकल कॉलेज में अंतिम प्राचार्य डॉ. आनंद स्वरूप थे, जिन्होंने इसी साल वीआरएस ले लिया। इसके बाद से कॉलेज को स्थाई प्राचार्य नहीं मिल सका है। यानी कार्यवाहक प्राचार्य से काम चलाया जा रहा है। इसके अलावा कॉलेज में पर्याप्त स्टाफ भी नहीं है। सैकड़ों फार्मासिस्टों को करीब एक साल से वेतन नहीं मिला है, जो कई दिन से हड़ताल पर हैं। कॉलेज सूत्रों ने बताया कि फार्मासिस्ट को धोबी के नाम से वेतन दिया जा रहा है।
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गोरखपुर की घटना से नहीं लिया सबक
प्रदेश की मौजूदा सरकार के कार्यकाल में गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी से सैकड़ों बच्चों की जानें चली गई थीं। मगर लगता है सरकार ने इतनी बड़ी घटना के बाद भी कोई सबक नहीं लिया है। यदि सबक लिया होता तो सहारनपुर के मेडिकल कॉलेज की हालत खराब नहीं होती। ओपीडी में प्रतिदिन करीब 2200 मरीज जाते हैं। इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में मरीज भर्ती हैं, जो गिने चुने चिकित्सकों के भरोसे जिंदा हैं। जिस प्रकार से प्राचार्य तक की कुर्सी खाली है। ऐसे में यदि ऑक्सीजन खत्म हो जाए तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
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सीएम को पत्र लिखा, विस में भी उठाएंगे मुद्दा
नगर विधायक संजय गर्ग बुधवार को कर्मचारियों की हड़ताल खत्म कराने के लिए कॉलेज पहुंचे थे। उन्होंने भी कॉलेज की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कॉलेज की स्थिति से अवगत करा चुके हैं, मगर सरकार की ओर से अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। आरोप लगाया कि सरकार नया कुछ करना तो दूर की बात मौजूदा चीजों को भी व्यवस्थित नहीं कर पा रही है। एमसीआई ने कॉलेज की मान्यता खत्म करने की चेतावनी दी है, जिसके बावजूद अव्यवस्थाएं लगातार बढ़ रही हैं। मामला विधान सभा में भी उठाया जाएगा।
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मेडिकल कॉलेज में सुविधाएं और फैकल्टी व अन्य स्टाफ बढ़ाने के लिए मैंने शासन को पत्र लिखा है। जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर कॉलेज की स्थिति से अवगत कराया जाएगा। किसी भी सूरत में कॉलेज की मान्यता खत्म नहीं होने दी जाएगी।
राघव लखनपाल शर्मा, सांसद।
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मेडिकल कॉलेज की स्थिति से मैं अच्छी तरह वाकिफ हूं। इस संबंध में शासन में बात भी की गई है। कोशिश यही है कि कॉलेज में तमाम सुविधाएं मिलें, जिससे जनपद की जनता को बेहतर इलाज मिल सके। साथ ही वहां पढ़ रहे मेडिकल के छात्रों का शिक्षण कार्य भी अच्छे से हो सके।
पीके पांडेय, डीएम।