सहारनपुर। आवारा जानवरों के आतंक से जीना दुश्वार हो गया है। गलियों से लेकर सड़कों और घरों की छतों तक आवारा पशुओं का राज है। नगर निगम के पास आवारा जानवरों से निजात दिलाने की कोई व्यवस्था नहीं है। यह हाल तब है, जब सहारनपुर स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल है।
शुक्रवार को आवारा कुत्तों ने कोतवाली बेहट क्षेत्र के गांव दयालपुर में नौ माह की मासूम बच्ची को नोचकर खा गए थे। जिले में पहले भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी है। इन दिनों पूरे जनपद सहित महानगर में आवारा कुत्तों, बंदरों और सांड़ का आतंक है। पिछले दिनों बंदरों के काटने से शारदानगर में एक महिला घायल हो गई थी। इसी तरह रामनगर पठानपुरा में बंदरों ने छत पर बैठे एक युवक को घायल कर दिया था। इसके अलावा सड़कों पर सांड़ द्वारा लोगों को घायल करने की कई घटनाएं हो चुकी है। देखा जाए तो गलियों से लेकर सड़कों तक आवारा जानवरों का पूरी तरह राज है। गलियों में आवारा कुत्ते, छतों पर उत्पाती बंदर तो सड़कों पर आवारा सांड़ घूम रहे हैं। नगर निगम के पास आवारा जानवरों से लोगों को निजात दिलाने की कोई व्यवस्था नहीं है। सहारनपुर स्मार्ट सिटी की दौड़ में पहले चरण से शामिल है, लेकिन यहां अन्य जनपदों की तरह आज तक काजी हाउस तक नहीं बनाया गया है। इस कारण आए दिन लोगों को आवारा जानवरों का शिकार होना पड़ता है। उधर, नगरायुक्त गौरव वर्मा का कहना है कि आवारा जानवरों से निजात दिलाने के लिए व्यवस्था की जा रही है।
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अस्पताल पहुंचते हैं रोजाना 30 से 40 लोग
सहारनपुर। आवारा कुत्तों द्वारा काटने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल में रोजाना 30 से 40 लोग आवारा कुत्तों के काटने पर घायल होकर अस्पताल पहुंचते हैं। इसके अलावा बंदरों के हमले से घायल होने की घटनाएं भी हर दूसरे दिन होती रहती हैं।