सहारनपुर। चिकित्सा के क्षेत्र में प्रतिदिन नए-नए शोध हो रहे हैं। गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज तलाश जा रहा है, मगर साधारण सी लगने वाली रेबीज बीमारी का दुनिया भर में कोई इलाज नहीं है। कुत्ते या उसकी प्रजाति के अन्य किसी भी जानवरों के काटने के तुरंत बाद एंटी रेबीज वैक्सीन का इंजेक्शन लेना ही इसका इलाज है।
कुत्ते के काटने से रेबीज होने से इनसान की जान जा सकती है। जनपद में समय-समय पर लोग कुत्ते के काटने से जान गंवाते रहे हैं। मगर इसके बावजूद आवारा कुत्तों से जनता को छुटकारा दिलाने के लिए कोई कदम प्रशासन की ओर से नहीं उठाया जाता है। शहरी क्षेत्र में केवल कुत्तों का खतरा है। गौरतलब है कि समय-समय पर कमेला क्षेत्र के कुत्ते लोगों पर हमला कर उन्हें जख्मी करते रहे हैं। मगर उसके बावजूद नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों को शहर से बाहर करने की कोई योजना नहीं है। 28 सितंबर को दुनिया भर में विश्व रेबीज दिवस मनाया जा रहा है। यहां भी अनेक संगठन इसे लेकर जागरूकता अभियान चलाते रहे हैं। चिकित्सकों की मानें तो रेबीज का इलाज पूरी दुनिया में नहीं है। ऐसे में कुत्ते के काटने के बाद रेबीज की चपेट में आने से बचने का एक ही विकल्प है और वह है कि कुत्ते के काटने के तुरंत बाद एंटी रेबीज वैक्सीन का इंजेक्शन लगवाने का। पिछले कुछ समय से प्रदेश में जगह-जगह से एंटी रेबीज वैक्सीन खत्म होने की खबरें आती रही हैं, मगर यहां के अधिकारियों का दावा है कि सहारनपुर में पर्याप्त मात्रा में एंटी रेबीज वैक्सीन उपलब्ध हैं।
जिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी और पीएचसी तक पर एंटी रेबीज वैक्सीन भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता काट लेता है तो उसको चाहिए कि वह तुरंत अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर एंटी रेबीज वैक्सीन का इंजेक्शन लगवाए, क्योंकि रेबीज का इलाज पूरी दुनिया में नहीं है।
डॉ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ।