देवबंद (सहारनपुर)। ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर होने वाली कुर्बानी को लेकर देवबंदी उलमा ने एकता और भाईचारे को बरकरार रखने की अपील की है। उनका कहना है कि मुसलमान दूसरे धर्म के लोगों की भावनाओं का खयाल रखते हुए गाय की कुरबानी से परहेज करें।
फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि जो हक हमें दस्तूर-ए-हिंद (भारतीय संविधान) ने दिया है उसको ध्यान में रखते हुए बकरीद पर कुर्बानी करें। साथ ही कहा कि मुसलमान ऐसा कोई काम न करें जिससे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हों। अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी ने कहा कि कुर्बानी करते वक्त यह ध्यान रखना जरूरी है कि इससे किसी दूसरे धर्म के लोगों को जरा भी परेशानी न हो। कुरबानी अल्लाह की रजा (खुशी) के लिए की जाती है। तंजीम अबना-ए-दारुल उलूम के अध्यक्ष मुफ्ती याद इलाही का कहना है कि बकरीद पर गाय को छोड़कर दूसरे जानवरों की कुरबानी करें। गौरतलब है कि देश में भाईचारे और आपसी सद्भाव को मजबूत रखने के लिए विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के अनुरोध पर गाय की कुरबानी को लेकर फतवा भी जारी किया था। इसके बाद से दारुल उलूम समय समय पर मुसलमानों से गाय की कुरबानी न करने की अपील करता रहा है।