अभिमन्यु वालिया
सहारनपुर। जिले में कुपोषित बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं तक पहुंचाए जा रहे पोषाहार में कटौती की जा रही है। एक किलोग्राम वाले गेहूं के पैकेट में 800 से 900 ग्राम राशन निकल रहा है। इसी तरह चावल के पैकेट में भी कम सामग्री निकल रही है। इसकी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। बावजूद इसके कार्रवाई नहीं हो रही है।
दरअसल, पोषाहार वितरण में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से यह कार्य स्वयं सहायता समूहों को सौंपा गया था, लेकिन व्यवस्था सुधरने के बजाय और गड़बड़ाने लगी है। स्वयं सहायता समूहों द्वारा कोटेदार के यहां से गेहूं व चावल लेकर तीन से छह साल के बच्चों के लिए एक किलो चावल, डेढ़ किलो गेहूं के पैकेट तैयार किए जाते हैं। इसी तरह गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए दो किलो गेहूं व डेढ़ किलो चावल के पैकेट बनाए जाते हैं, जबकि चने की दाल के पैकेट शासन की ओर से पैक होकर आते हैं। ऐसी भी शिकायत हैं कि दाल के जो पैकेट आए, उन्हें खोलकर सामग्री कम करके दोबारा पैकिंग कर दी गई।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कर चुकी शिकायत
पोषाहार के पैकेटों में कटौती किए जाने के मामले सामने आ रहे हैं। पुवांरका की ब्लॉक दतौली रांघड़ क्षेत्र की आंगनबाड़ी प्रवेश रानी, प्रवेश गोयल, पूनम, मीनाक्षी ने एक स्वयं सहायता समूह के खिलाफ लिखित शिकायत की है, जिसमें कहा है कि गेहूं और चावल के पैकेटों में 100 से 200 ग्राम की कटौती की जा रही है। आंगनबाड़ियों ने यह शिकायत पोर्टल पर और जिला कार्यक्रम अधिकारी से भी शिकायत की है। यह मामला उदाहरण मात्र है। इसी तरह अनेक जगहों पर कटौती किए जाने की शिकायत हो रही हैं।
पैकेट से कम निकलता है पोषाहार
गंगोह क्षेत्र के गांव सरकड़ में करीब आठ बच्चे कुपोषित हैं, जबकि पड़ोसी गांव सिकंदरपुर में एक बालिका कुपोषित है। गांव सिकंदरपुर निवासी जैनब के पिता शहजाद व गांव सरकड़ निवासी अल्तमश के पिता महमूद हसन का कहना है कि योजना का लाभ पूरी तरह से नहीं मिल पा रहा है। पैकेटों में कम पोषाहार निकलता है। तेल भी हर माह नहीं मिलता है। शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं होती है। देवबंद क्षेत्र के गांव तल्हेड़ी निवासी मोमिना ने बताया कि उसकी 13 माह की पुत्री हुस्ना कुपोषित है। काफी समय से उन्हें पोषाहार नहीं मिला है।
आंकड़ों की नजर में
- 700 स्वयं सहायता समूह हैं जिले में
- 3410 आंगनबाड़ी केंद्र हैं।
- 20 हजार कुपोषित और 1500 अति कुपोषित बच्चे
- 30 हजार गर्भवती महिलाएं, 36 हजार धात्री महिलाएं
पोषाहार में कटौती किए जाने के मामले की वह जांच कराएंगे। इनमें जो भी स्वयं सहायता समूह दोषी पाया जाएगा, उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। -- अरुण कुमार उपाध्याय, उपायुक्त एनआरएलएम
शिकायतें मिली हैं, जिनका निस्तारण भी कराया जा रहा है। उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हुए उनके विभाग द्वारा कार्रवाई भी की जा रही है। कुुुपोषित बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं को किसी तरह परेशानी नहीं होने दी जाएगी, जो भी लापरवाही बरतेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
- आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी