अपहरण के आरोपी को दस साल का कारावास
- 22 वर्ष बाद मिली सजा, अपहृत का अब तक पता नहीं
- आरोपी पर लगाया 30 हजार रुपये जुर्माना
अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। अपहरण के 22 साल तक चले मुकदमे में दोषी पाए गए मिर्जापुर के ग्राम सैनपुर निवासी संता उर्फ संतराम को दस वर्ष का कारावास एवं 30 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र के ग्राम गढ़ी निवासी इंद्रा अपने पति एवं बच्चों के साथ सदर कोतवाली क्षेत्र में किराए पर रहती थी। 27 जून 1997 को इंद्रा अपने पति रविंद्र और बच्चों के साथ यमुनानगर जाने के लिए रेलवे स्टेशन पर पहुंच कर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। सहायक शासकीय अधिवक्ता विक्रम सिंह वर्मा के अनुसार उसी समय रविंद्र के पूर्व परिचित संजय, विजय और संता वहां पहुंचे और रविंद्र की नौकरी लगवाने की बात कही। उनकी बात पर विश्वास करके पूरा परिवार उनके साथ चल दिया। जनता रोड बस अड्डे पर रविंद्र की तबियत खराब हो गई। संजय और संता रविंद्र को लेकर डाक्टर को दिखाने के लिए ले गए। जबकि इंद्रा के पास तीसरा व्यक्ति विजय रह गया। दो घंटे बाद संजय और संता भी लौट आए, लेकिन रविंद्र नहीं लौटा। इंद्रा ने अपने पति के बारे में पूछा तो उसे पति के शीघ्र वापस आने का दिलासा दिलाते रहे।
सहायक शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि इंद्रा की ओर से सदर कोतवाली में 29 अक्तूबर 1997 को रविंद्र के अपहरण का मामला दर्ज कराया गया। जिसमें संजय, विजय और संता पर अपहरण करने का आरोप लगाया था। अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या छह तैय्यब हसन की अदालत में यह मुकदमा चला। संजय एवं विजय तो कोर्ट में पहुंचते रहे, लेकिन संता उर्फ संतराम फरार रहा। जिस कारण संजय एवं विजय का मुकदमा अलग चलता रहा, जबकि संता के मुकदमे की फाइल अलग हो गई। बाद में पुलिस ने संता उर्फ संतराम को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट ने संजय एवं विजय को वर्ष 2013 में दोषमुक्त करार दिया था। जबकि संता पर मुकदमा चलता रहा। शनिवार को अपर सत्र न्यायाधीश तैय्यब हसन ने सुनवाई के बाद साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर संता उर्फ संतराम को दोषी पाते हुए 10 वर्ष कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा उसे 30 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है।