प्रयागराज। स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए ने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज हिंसक प्रदर्शन करने और धार्मिक भावनाओं को भड़काने के मुकदमे को वापस लेने के सरकार के निर्णय को मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने इस मामले में केशव मौर्य सहित चार लोगों को लंबित मुकदमे में आरोप मुक्त कर दिया है। शासन के निर्देश पर अभियोजन की ओर से मुकदमा वापसी की अर्जी दी गई थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए मुकदमा समाप्त कर दिया है। यह आदेश स्पेशल जज डॉ. बालमुकुंद ने विशेष लोक अभियोजक वीरेंद्र सिंह गोपाल, जय गोविंद उपाध्याय और कुंज बिहारी मिश्रा को सुनकर दिया है।
एक सितंबर 2011 को कौशाम्बी के मंझनपुर कोतवाली थाना प्रभारी जंग बहादुर सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसमें आरोप था कि तत्कालीन किसान मोर्चा के प्रदेश महामंत्री केशव प्रसाद मौर्य, विभूति नारायण सिंह, जयचंद मिश्रा, यशपाल केसरी, प्रेमचंद्र चौधरी और देवेंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में एक जुलूस निकला गया। इसमें शामिल लोगों ने एसपी कौशाम्बी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। कार्यालय में घुसकर नारे लगाए और एक दूसरे समुदाय के व्यक्ति को मारापीटा था।
इस संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि ननसाई गांव में एक हत्या के मामले में केशव प्रसाद मौर्य का नाम आने पर यह प्रदर्शन किया गया था। उत्तर प्रदेश शासन में सचिव अरुण कुमार राय ने 19 अगस्त 2018 को अभियोजन वापसी के लिए जिला मजिस्ट्रेट इलाहाबाद को निर्देश दिया था, जिस पर जिला शासकीय अधिवक्ता गुलाब चंद्र अग्रहरि के आदेश पर अभियोजन वापसी के लिए एडीजीसी राजेश गुप्ता ने एमपी-एमएलए कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। शुक्रवार को स्पेशल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई, जिसमें अभियोजन की ओर से मुकदमा वापसी के संबंध में तर्क प्रस्तुत किया गया। कोर्ट ने अभियोजन की अर्जी को स्वीकार कर ली और अभियुक्तों को आरोप से मुक्त कर दिया। उक्त प्रकरण में अभियुक्त देवेंद्र सिंह चौहान की पहले ही मृत्यु हो चुकी है।