नई जेल के निर्माण को लेकर योगी सरकार ने एक बार फिर कवायद शुरू कर दी है। चीनी मिल के आवास खाली कराने की कवायद शुरू की जा रही है। इसको लेकर शासन के निर्देश के बाद चीनी निगम के प्रबंध निदेशक ने जिलाधिकारी से कब्जे खाली कराने का अनुरोध किया है। वहीं, मंडलायुक्त भी आवास खाली कराने को लेकर सक्रिय हो गए हैं।
समाजवादी सरकार में नगर विकास मंत्री रहे आजम खां ने शहर में नई जेल को मंजूरी दिलाई थी। इसके निर्माण के लिए करीब तीन साल पहले कवायद शुरू हुई। चूंकि, प्रोजेक्ट आजम खां का था, लिहाजा सरकार ने भी इसे तुरंत मंजूरी देते हुए निर्माण के लिए बीस करोड़ रुपये भी जारी कर दिए। इसके लिए सिविल लाइंस क्षेत्र में चीनी मिल की जमीन देखी गई। कारागार विभाग ने चीनी निगम से करीब 66 करोड़ रुपये में 41.460 हेक्टेयर जमीन खरीद ली, लेकिन इसके बाद जमीन को लेकर विवाद हो गया। चीनी मिल कालोनी के बाशिंदों ने जमीन खाली करने इनकार कर दिया, जिसके बाद प्रशासन ने सख्ती करते हुए चीनी मिल कालोनी के मकान तोड़ दिए थे। 254 आवासों में से 42 आवास खाली भी कराए गए। कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज ने फरवरी 2015 में चीनी मिल का निर्माण शुरू करा दिया। करीब दस माह तक यह काम चला। इस बीच चीनी मिल कालोनी के बाशिंदे हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने स्टे जारी कर दिया और आठ नवंबर 2015 को नई जेल का निर्माण कार्य रूक गया। तब तक यह कार्य महज 15 फीसद हो सका था। इसमें बाउंड्री वाल, मैन वाल, सर्किल वाल, पार्टिशन वाल और पुरुष बैरक के फाउंडेशन का कार्य पूरा हुआ था। इसके बाद से लगातार हाईकोर्ट में कानूनी दांवपेंच चलते रहे। मामले को पूरी तरह सुनने के बाद हाईकोर्ट ने स्टे खारिज कर दिया, जिस पर फिर से काम शुरू हुआ। किन्तु, इसके बाद सूबे में सत्ता परितर्वन हो गया। कालोनी के लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिले और अपनी व्यथा सुनाई। तभी से यह काम रुका हुआ था, लेकिन अब योगी सरकार फिर से इस प्रोजेक्ट को लेकर मेहरबान है। इसको लेकर शासन ने कारागार महानिरीक्षक से भी रिपोर्ट मांग ली कि हाईकोर्ट से स्टे खारिज होने के बाद चीनी मिल से अवैध कब्जे क्यों खाली नहीं कराए गए।
इस पर महानिरीक्षक ने मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को लिखा, जिस पर डीएम ने सितंबर माह में रिपोर्ट महानिरीक्षक और शासन को भेज दी। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि जल्द ही आवास खाली कराए जाएंगे, लेकिन इसके बाद भी आवास खाली नहीं हो सके। शासन के निर्देश के बाद अब एक बार फिर चीनी मिल के आवास खाली कराने की कवायद शुरू की गई है। इसको लेकर उत्तर प्रदेश राज्य चीनी एवं गन्ना विकास निगम लिमिटेड के प्रधान प्रबंधक ने एक दिसंबर को फिर जिलाधिकारी से चीनी मिल के आवास खाली कराने का अनुरोध किया है। वहीं, मंडलायुक्त ने भी निकाय चुनाव के बाद आवास खाली कराने की कार्रवाई की बात कही थी, जिस पर अब चीनी मिल प्रबंधन और सीएंडडीएस दोनों ही विभागों के अफसर सक्रिय हो गए हैं।