घटना की जानकारी किसान नेताओं की दी
हरदीप सिंह ने घटना की जानकारी अपने परिजनों समेत किसान नेताओं और पुलिस अधिकारियों को दी। उनका कहना था कि वह लखीमपुर कांड के गवाह हैं और उन्हें गवाही देने से रोकने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन वह पीछे नहीं हट रहे जिसकी वजह से उनके ऊपर हमला कर दिया गया। उनका आरोप है कि यह हमला उन्हें डराने के लिए किया गया है, लेकिन वो डरने वाले नहीं हैं। दो बार कोर्ट में जाकर गवाही दे चुके हैं।
हरदीप सिंह ने घटना की तहरीर बिलासपुर कोतवाली में दी। वहीं, इस मामले को लेकर सपा नेता तेेजेंद्र सिंह बिर्क, जगजीत सिंह गिल, गुरचरन सिंह आदि किसान नेता भी कोतवाली पहुंचे और सीओ अरुण कुमार सिंह व कोतवाली प्रभारी तेजवीर सिंह से मिले और रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की। जिसके बाद पुलिस ने आईपीसी की धारा 147, 323, 504, 506 यानि एकराय होकर मारपीट करना, गाली-गलौज करना और धमकी देने के आरोप में नेता मेहर सिंह, सिरबजीत व तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
एक आरोपी को बताया भाजपा नेता, जिलाध्यक्ष ने किया इनकार
हरदीप सिंह ने उन पर हमला करने का आरोप लगाते हुए जो एफआईआर दर्ज कराई है। उसमें एक आरोपी मेहर सिंह दयोल को भाजपा पदाधिकारी बताया है। हालांकि इस मामले में भाजपा जिलाध्यक्ष अभय गुप्ता का कहना है कि मेहर सिंह दयोल नामक कोई व्यक्ति इस समय पार्टी में पदाधिकारी नहीं है। अगर पूर्व में किसी मोर्चे के पदाधिकारी रहे हों तो उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है।
एसपी ने रोडरेज का बताया मामला
एसपी रामपुर अंकित मित्तल का कहना है कि बिलासपुर क्षेत्र के किसान हरदीप सिंह ने हमले का आरोप लगाते हुए तहरीर दी थी। जिस पर दो लोगों को नामजद करते हुए पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच के लिए सीओ बिलासपुर ने घटनास्थल का निरीक्षण किया गया था। जिसमें वादी व अन्य व्यक्तियों से पूछताछ की गई तो प्रथम दृष्टया मामला रोडरेज (चालकों द्वारा हिंसक रोष व्यक्त करने) का पाया गया है। अभी तक की जांच में इस घटना का लखीमपुर हिंसा की गवाही से कोई संबंध नहीं है।