रामपुर। वन विभाग ने वन्यजीवों की निगरानी और जंगलों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यालय को संसाधनों की डिमांड भेजी है। विभाग ने तीन पिंजरे, दो थर्मल ड्रोन, दो बेहोशी की गन, जाल, रस्सा और हेलमेट की मांग की है। थर्मल ड्रोन मिलने के बाद रात में तेंदुओं की निगरानी के साथ जंगलों में लकड़ी तस्करों पर भी नजर रखी जा सकेगी।
जनपद के स्वार, मसवासी, दढ़ियाल और टांडा क्षेत्र में आए दिन तेंदुए आबादी के आसपास दिखाई दे रहे हैं। कई बार तेंदुआ एक स्थान से निकलकर एक ही दिन में कई गांवों में पहुंच जाता है। ऐसे में वन विभाग की टीमों को लगातार अलग-अलग स्थानों पर निगरानी करनी पड़ती है।
पर्याप्त पिंजरे और अन्य संसाधन नहीं होने के कारण एक साथ कई स्थानों पर कार्रवाई करना चुनौती बन जाता है। विभाग ने इसी को देखते हुए अतिरिक्त संसाधनों की मांग की है।
थर्मल ड्रोन रात में अंधेरे के बावजूद गर्मी के आधार पर तेंदुए की मौजूदगी का पता लगाने में मदद करेंगे। इससे टीमों को तेंदुए की लोकेशन तलाशने और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने में आसानी होगी। इसके साथ ही थर्मल ड्रोन जंगलों की सुरक्षा में भी अहम भूमिका निभाएंगे।
रात के समय जंगल में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी की जा सकेगी। खासतौर पर लकड़ी तस्करों की आवाजाही पर नजर रखने और उनकी गतिविधियों का पता लगाने में ड्रोन मददगार होंगे। इससे वन विभाग को जंगलों में गश्त और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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तेंदुओं की गतिविधियों को देखते हुए अतिरिक्त संसाधनों की मांग मुख्यालय को भेजी गई है। इसमें तीन पिंजरे, दो थर्मल ड्रोन, दो बेहोशी की गन समेत जाल, रस्सा और हेलमेट शामिल हैं। थर्मल ड्रोन से रात में तेंदुओं की निगरानी के साथ जंगलों में संदिग्ध गतिविधियों पर भी नजर रखने में मदद मिलेगी। -प्रणव जैन, डीएफओ