चंद मिनट में चेकअप और पर्चे पर दवा लिखते हुए परामर्श, इसके बाद अगले का बुलावा। कुछ यही नजारा सोमवार को जिला अस्पताल में देखने को मिला। भीड़ ज्यादा होने से डॉक्टर मरीजों को ज्यादा समय नहीं दे सके।
होली की छुट्टी के बाद खुले जिले अस्पताल में मरीजों की भीड़ रही। प्रत्येक चिकित्सकों के कक्ष के बाहर कतारें लगी थीं। पैथोलॉजी लैब हो या फिर प्लास्टर रूम और पर्चा काउंटर हर जगह पर मरीजों में धक्कामुक्की और जल्दी काम कराने की होड़ रही। सोमवार की जिला अस्पताल में 1285 मरीजों की ओपीडी रही।
होली पर छुट्टी होने की वजह से अभी तक जिला अस्पताल पूरी तरह से खुला नहीं था। शनिवार को भी 11 बजे तक की ओपीडी रही, जिससे मरीजों को परेशानी हुई थी। वहीं, सोमवार को अस्पताल खुला और सभी डॉक्टर बैठे तो मरीज की भीड़ उमड़ पड़ी। छुट़्टी की वजह से हेपेटाइटिस-सी और बी के मरीजाें को भी काफी दिक्कत हुई। त्योहार पर छुट्टी होने वजह से इससे संबंधित मरीजों को दवा नहीं मिल पाई। ऐसे में सोमवार सुबह काउंटर खुला तो करीब 70-80 मरीज पहुंच गए और चेकअप के साथ दवाइयां ली।
प्लास्टर रूम में 15-16 मरीज पहुंचे थे। इनमें से कुछ ऐसे थे, जिनका प्लास्टर होना था तो कई ऐसे भी थे जो प्लास्टर खुलवाने के लिए पहुंचे थे। ऐसे में यहां तीमारदार अपने मरीज को स्ट्रेचर से ले जाते दिखाई दिए। वहीं, फिजीशियन डॉ. हसीब अहमद के कक्ष के बाहर महिला और पुरुषों की अलग कतारें लगी थीं, जहां करीब 150 मरीज पहुंचे थे, जिनका चेकअप डॉक्टर ने किया। वह सभी मरीजों को देखने के लिए करीब तीन मिनट में चेकअप और एक मिनट परामर्श के देते हुए अगले मरीज को बुला रहे थे। कम समय में सभी मरीजों को देखने चुनौती भरा था।
20 से 25 मरीज एक्सरे कराने के लिए पहुंचे, पैथ लैब में आए 35 रोगी
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. लखवीर सिंह के कक्ष के बाहर 20-25 मरीज खड़े थे जो एक्सरे कराने पहुंचे थे, यहां पर समय कम होने की वजह से एक्सरे देखने के बाद सीधे दवा लिखी गई। यही हाल डॉ. दशरथ सिंह के कक्ष में दिखाई दिया। यहां पर कक्ष के अंदर भीड़ रही। पैथोलॉजी में 35 मरीज पहुंचे थे, जिनमें से कुछ रिपाेर्ट तो कुछ ब्लड सैंपल देने के लिए पहुंचे थे। दोपहर दो बजे तक मरीजों की भीड़ कुछ कम होने लगी थी।
होली की छुट्टी के बाद अस्पताल खुला है। ऐसे में भीड़ बढ़ती है और सोमवार को हर बार भीड़ अधिक होती है। डॉक्टरों ने भी समय रहते सभी मरीजों का चेकअप किया और दवाएं लिखीं है।
-डॉ. एचके मित्रा, सीएमएस