हजरत रसूल की पाक निशानी से जुड़े कदम शरीफ का बेशकीमती तोहफा अरब के बादशाह ने लगभग 144 साल पहले रामपुर के नवाब को दिया था। अकीदत के इस बड़े मरकज कदम शरीफ को जाने के लिए कोई पक्की सड़क तक नहीं है। ईंट के खड़ंजे वाले रास्ते मेें गड्ढे चौंकाते हैं।
रोज यहां हजारों अकीदतमंद आते हैं। लोग परेशान होते हैं लेकिन इसे बनवाने की जहमत पालिका, पीडब्लूडी किसी भी महकमे ने नहीं की। जुमेरात (बृहस्पतिवार) को यहां मेला लगता है। लोगों की मांग है कि इस मुकद्दस स्थान तक जाने वाली सड़क ठीक करवाई जाए।
अरबी किताबों में भी नक्श-ए- कदम शरीफ का हवाला है। नक्शे कदम शरीफ 10 मार्च 1873 को कोठी बेनजीर के सामने एक गुंबद बनवाकर उसमें कायम किया गया था। इसकी देखभाल को दो सौ एकड़ जमीन दी गई। आदिमाने कदम शरीफ को व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी। कदम शरीफ के चारों ओर चमचमाती सड़कें हैं और कदम शरीफ जाने का रास्ता उबड़-खाबड़ है। न किसी जनप्रतिनिधि नही किसी महकमे ने कदम शरीफ का रास्ता बनवाया।