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बरसात की वजह से उफनाई कोसी नदी, किसानों की फसलों को नुकसान

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दढ़ियाल (रामपुर)। लगातार बारिश और रामनगर बैराज से पानी छोड़े जाने से शनिवार को कोसी नदी का जलस्तर बढ़ गया। करीब तीन बार में 33148 क्यूसेक पानी आने की वजह से कोसी नदी उफना गई। नदी किनारे किसानों की सब्जी की फसल नष्ट हो गई। कोसी में और अधिक पानी बढ़ने की सूचना से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ने लगी है। वहीं, पुलिस प्रशासन ने लोगों को बाढ़ की आशंका के चलते सतर्क रहने को कहा है।
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उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में पिछले तीन दिनों से लागातर बारिश हो रही है। ऐसे में रामनगर बैराज पर पानी के ज्यादा दबाव के चलते शुक्रवार की रात करीब 16 हजार तीन सौ क्यूसेक पानी कोसी नदी में छोड़ा गया। वहीं, शनिवार को सुबह आठ बजे 12540 क्यूसेक पानी फिर छोड़ दिया गया, जबकि इसके तीन घंटे बाद 11 बजे 11668 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। दोपहर ढाई बजे 1800 क्यूसेक, इसके बाद शाम करीब पांच बजे 7140 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। शनिवार को कुल मिलाकर 33148 क्यूसेक पानी छोड़ा जा चुका है। अब यह पानी रामपुर पहुंचना शुरू हो गया है। ऐसे दढ़ियाल में कोसी नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। दोपहर तक सैकड़ों बीघा सब्जी की फसल पानी की चपेट में आ गई और नष्ट हो गई। नदी में पानी बढ़ने से कस्बे के धर्मेंद्र, छत्रपाल, मुश्ताक अहमद, गंगाराम, मानसिंह, हुकुम सिंह, नफीस अहमद, नन्हा, भूरा, सुभाष, इस्लाम, रूप सिंह आदि किसानों की सैकड़ों बीघा लौकी, तोरई, करेला, टमाटर, खीरा की फसल बह गई। किसान बढ़ते जलस्तर को देखकर खेतों में बनी झोपड़ियों को छोड़कर भाग आए। दोपहर बाद भी कोसी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी जारी थी। ऐसे में किसानों को बाढ़ का डर सताने लगा है। वहीं, स्थानीय पुलिस ने उच्चाधिकारियों से निर्देश मिलने के बाद कस्बे और आसपास के गांवों के ग्रामीणों को सतर्क किया है। पुलिस ने लोगों को कोसी नदी से गुजरने अथवा उसके आसपास खेतों में जाने से मना किया है। सतर्कता की दृष्टि से सहकारी समिति स्थित बाढ़ चौकी पर टांडा कानूनगो जयपाल सिंह सहित लेखपाल अरुण कुमार, शुभम भारद्वाज आदि तैनात रहे।
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