पहाड़ी और मैदानी इलाकों में हो रही भारी बारिश से कोसी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है । भारी बारिश से कोसी नदी पर बने बांध पर जगह-जगह दरारें पड़ने से बांध क्षतिग्रस्त होता जा रहा है, लेकिन सिंचाईं विभाग ने अभी तक बांध की कोई सुध नहीं ली है। ऐसा लगता है कि विभाग कोसी नदी में बाढ़ आने का इंतजार कर रहा है। कोसी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे स्थित गांवों के ग्रामीण दहशत में हैं।
कोसी नदी में 14 करोड़ की लागत से गांवों को बाढ़ के दंश से बचाने के लिए मुंशीगंज से लालपुर तक बांध का निर्माण सरकार द्वारा कराया गया था। सिंचाईं विभाग की अनदेखी के चलते बांध को बचाने के लिए बनाए गए पत्थर और लकड़ी के स्पर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। पहाड़ी और मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश से कोसी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है । ऐसे ही लगातार जल स्तर बढ़ता गया तो बांध को खतरा हो सकता है।क्योंकि बारिश से बांध में जगह-जगह गहरी दरारें, गड्ढे एवं कई स्थानों से बांध क्षतिग्रस्त हो चुका है।
अगर सिंचाई विभाग द्वारा समय रहते बांध और स्परों की मरम्मत नही की गई तो नगर सहित दर्जनों गांवों को बाढ़ का दंश झेलना पड़ सकता है। वहीं गुरुवार की रात्रि रामनगर बैराज से कोसी नदी में छोड़े जा रहे पानी से नदी का जल स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे किसानों की सब्जी की फसलें जलमग्न होने के कारण बर्बाद हो गई है। किसानों को पशुओं का चारा लाने के लिए नदी पार कर भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे किसान परेशान है और लगातार जलस्तर बढ़ने से ग्रामीण में दहशत में हैं।
तहसीलदार कृष्ण गोपाल मिश्रा ने बताया कि बांध की मरम्मत कराए जाने को लेकर सिंचाई विभाग को कई बार अवगत कराया जा चुका है। भारी बारिश के चलते बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को सचेत रहने के निर्देश दिए गए हैं। दढ़ियाल में कोसी पुल से ग्राम घोसीपुरा तक बांध की स्थिति पिछले कुछ सालों से मरम्मत के अभाव में बदतर हो गई है। जगह-जगह रेनकट ने बांध को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया है
पिछले कुछ दिनों में हुई बारिश ने इन रेनकट और रेटकट की दरारों को और भी चौड़ाकर दिया है, जिससे बांध की स्थिति बद से बदतर हो गई है हालांकि इस वर्ष जून माह के प्रारंभ में सिंचाई विभाग ने बांध की मरम्मत कराई थी, लेकिन वह मात्र खानापूर्ति रही। बांध की ऊपरी सतह पर मिट्टी डालकर विभाग ने लाखों रुपये फूंक दिए, जबकि बांध की दरारें जस की तस बनी हुई हैं। बाढ़ आने पर इन दरारों से पानी का रिसाव होने से बांध पल भर में ध्वस्त हो सकता है। लोग वर्षों पहले मिलक सिटला और घोसीपुरा के बीच बांध कटने पर मची तबाही को याद कर सिहर उठते हैं।