रामपुर। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण तारकोल के दामों में भारी उछाल आ गया है। तारकोल 25 हजार रुपये प्रति टन बढ़कर 75 हजार रुपये प्रति टन हो चुका है। इस बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने बढ़े हुए दाम के अनुसार ठेकेदारों को भुगतान करने की अनुमति तो दे दी है, लेकिन राज्य सरकार के स्तर से अभी तक आदेश जारी नहीं हो पाए हैं। इसी वजह से जिले में 30 सड़कों का निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है।
युद्ध के चलते न सिर्फ कीमतें बढ़ी हैं, बल्कि सामग्री की कमी के कारण लोनिवि के दो हॉटमिक्स प्लांट भी बंद हो गए हैं। इसका सीधा असर सड़क निर्माण पर पड़ा है। जिले में चल रही करीब 30 सड़कों का काम रुक गया है। इन्हीं हालातों को देखते हुए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 17 अप्रैल को सभी राज्यों के सचिवों, एनएचएआई और अन्य संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी कर मूल्य समायोजन का भुगतान करने के आदेश दिए हैं। यह राहत विशेष रूप से उन अनुबंधों के लिए होगी, जिनमें अब तक मूल्य समायोजन की कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।
केंद्र ने स्पष्ट किया है कि यह समायोजन तारकोल की कीमतों में आई तेजी को देखते हुए एक अप्रैल से 30 जून की अवधि के लिए लागू होगा। यह उन सभी अनुबंधों पर प्रभावी होगा, जिनकी बोली (बिड) इसी अवधि के दौरान देय थी।
जहां एनएचएआई आदि ने तुरंत इसके आदेश जारी कर दिए, वहीं राज्य सरकार ने अभी तक इस संबंध में कोई निर्देश जारी नहीं किया है। ऐसे में सड़क निर्माण से जुड़े ठेकेदारों और उद्यमियों में चिंता का माहौल है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि राज्य सरकार ने जल्द ही आदेश जारी नहीं किए तो मानसून सीजन में यह काम अधूरे रह सकते हैं, जबकि वर्तमान मौसम डामरीकरण के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। एई राजेंद्र सिंह का कहना है कि जल्द इस मामले में मुख्यालय से आदेश आ सकते हैं।