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Rampur News: भाजपा के सामने है रामपुर विधानसभा सीट पर सपा की बढ़त को पाटने की चुनौती

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रामपुर। रामपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भाजपा ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है। सरकार के कई मंत्रियों के साथ-साथ संगठन के पदाधिकारियों ने रामपुर में डेरा रखा है। भाजपा इस विधानसभा सीट पर अपना पूर जोर इसलिए लगा रही है कि अब तक यहां सपा का दबदबा रहा है। चाहे चुनाव हो या उपचुनाव सपा ने अपनी बढ़त बरकार रखी है। 2022 के लोकसभा उपचुनाव में भले ही भाजपा ने जीत हासिल की थी, लेकिन रामपुर विधानसभा सीट पर सपा बढ़त बनाने में कामयाब रही थी। इस बढ़त को पाटने की कोशिश में भाजपा लगी हुई है। भाजपा को अपनी इस कोशिश में कितनी कामयाबी मिलती है, इस बात का पता तो 8 दिसंबर को चुनाव परिणाम आने के बाद ही चलेगा।
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रामपुर विधानसभा सीट पर 1980 से लेकर 2022 के बीच सिर्फ 1996 के चुनाव को छोड़कर आजम खां ने लगातार जीत हासिल की है। 1996 में कांग्रेस के प्रत्याशी अफरोज अली खां से चुनाव हार गए थे। आजम खां दस बार इस सीट से विधायक रहे हैं। 2019 में जब आजम खां जब रामपुर संसदीय सीट से सांसद निर्वाचित हुए तो इस सीट पर हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी ने डॉ. तजीन फात्मा ने लगभग 7700 मतों से जीत गई थीं। उस वक्त इस रामपुर विधानसभा सीट पर 41.56 फीसदी मतदान हुआ था। इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से आजम खां ने चुनाव लड़ा। इस सीट पर लगभग 56.35 फीसदी मतदान हुआ और आजम खां 55 हजार से अधिक मतों से विजयी हुए। विधायक बनने के बाद आजम खां ने लोकसभा की सीट छ़ोड़ दी थी। इसके बाद इसी साल जून माह में लोकसभा का उपचुनाव हुआ, जिसमें भाजपा के घनश्याम लोधी ने जीत हासिल की थी। वैसे लोकसभा के उपचुनाव में लगभग 42 फीसदी मतदान हुआ था, लेकिन रामपुर विधानसभा सीट पर यह आंकड़ा 31.49 फीसदी के स्तर पर था। इसके बाद भी भाजपा के घनश्याम सिंह लोघी रामपुर विधानसभा सीट पर सपा के प्रत्याशी आसिम राजा के मुकाबले पिछड़ गए थे। इस सीट के समीकरण कुछ तरह हैं कि बिना अल्पसंख्यक मतदाताओं के समर्थन के जीत हासिल करना मुश्किल है। इस वजह से भाजपा सपा के वोट बैंक में सेंध लगाने में जुटे हुई है। सपा के कई नेता भाजपा के खेमे में आ गए हैं, जिसमें आजम खां के कई करीबी भी हैं। भाजपा ने अल्पसंख्यक वोट बैैंक में सेंध लगाने के लिए अपने उन मंत्रियों और पदाधिकारियों को मैदान में उतार दिया है जो इस वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। वहीं भाजपा के प्रत्याशी आकाश सक्सेना का दावा है कि हम इस अंतर को पाट चुके हैं। बड़ी संख्या में अल्पसंख्य में मतदाता हमसे चुके हैं। हमारा कारवां तेजी से आगे बढ़ रहा है। 8 दिसंबर को इस विधानसभा सीट के सारे पुराने रिकॉर्ड और समीकरण टूट जाएंगे। परिणाम ऐसा आएगा कि राजनीति के माहिर भी भौचक्के रह जाएंगे। भाजपा की यह कोशिश कितनी कामयाब होती है इस बात का पता तो 8 दिसंबर को चलेगा जब चुनाव परिणाम आएगा।
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