नोटबंदी से आटोमोबाइल मार्केट को भी तगड़ा झटका लगा है। खासतौर पर सहालग के सीजन में गुलजार रहने वाला वाहन बाजार में सन्नाटा छाया हुआ है। हर रोज दो और चार पहिया वाहनों के मार्केट को करीब एक करोड़ रुपये की चोट लग रही है। जिससे शो-रूम संचालकों में निराशा है। साथ ही नोटबंदी के कारण खरीदारों में भी मायूसी छायी हुई है।
बिना टू व फोर व्हीलर के शादी लगभग अब असंभव सी होती जा रही है। शादी में लड़की पक्ष गिफ्ट के रूप में अपनी हैसियत के मुताबिक टू व्हीलर या फिर फोर व्हीलर लड़का पक्ष को जरूर देता है। इसी हिसाब से धन भी अर्जित करता है। सहालग की शुरुआत होते ही वाहन बाजार संचालकों के चेहरे खिल जाया करते थे, लेकिन एक हजार व पांच सौ के पुराने नोट बंदी के कारण वाहन बाजार पूरी तरह खामोश है। क्योंकि वाहन बाजार में नए वाहनों की खरीद न के बराबर होकर रह गई है।
रामपुर के वाहन बाजार पर नजर दौड़ाई जाए तो जिले में हीरो, होंडा, बजाज, महेंद्रा, टीवीएस, यामाहा, सुजुकी समेत आठ कंपनियों के करीब 47 से ज्यादा डीलर और सब डीलर हैं। इनका सालाना कारोबार करीब 1200 करोड़ आंका गया है। यही स्थिति चार पहिया वाहनों की भी है। चार पहिया वाहनों की महेंद्रा, मारूति, हुंडई जैसी कंपनियों के चार डीलर व सब डीलर है।
रामपुर में पिछली सहालग में 50 से 60 कारें हर रोज बिका करती थीं, लेकिन इस दफा सहालग में 10-15 कारों की बिक्री महज रह गई है। यानी हर रोज 25 से 30 लाख रुपये की चोट चार पहिया वाहन बाजार को लग रही है। वाहन बाजार के संचालक परेशान नजर आ रहे हैं। इनका मानना है कि बाजार में स्थिति ठीक नहीं है। बड़े नोट बंद हो चुके हैं। कैश लोगों के पास है नहीं। ऐसी स्थिति में सहालग में वाहन बाजार आधे से भी कम रह गया है।