रामपुर की अदालत में पूर्व सांसद व फिल्म अभिनेत्री जयाप्रदा से जुड़े आचार संहिता उल्लंघन केस की सुनवाई हुई। इसमें कोर्ट ने गवाह के अभाव में उन्हें बरी कर दिया गया है। उनके खिलाफ 2019 में यह केस दर्ज किया गया था।
पूर्व सांसद जयाप्रदा को कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। आचार संहिता के उल्लंघन के एक मामले में कोर्ट ने पूर्व सांसद को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। पूर्व सांसद जयाप्रदा के खिलाफ 2019 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान केमरी थाने में आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया था।
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यह मामला कोर्ट में विचाराधीन था। अभियोजन की ओर से पांच गवाहों के बयान दर्ज कराए गए थे। पूर्व सांसद जयाप्रदा ने अपने बचाव में तीन गवाहों के बयान दर्ज कराए थे। दोनों पक्षों की बहस एक जुलाई को पूरी हो गई थी। फैसले के लिए बृहस्पतिवार का दिन तय किया गया था।
कोर्ट ने दोपहर ढाई बजे अपना फैसला सुनाया। एमपी-एमएलए कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) शोभित बंसल ने साक्ष्य के अभाव में पूर्व सांसद जयाप्रदा को बरी कर दिया। इससे पहले पूर्व सांसद जयाप्रदा कोर्ट पहुंची,जहां कोर्ट ने उनकी मौजूदगी में फैसला सुनाया।
ये था मामला
2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहीं पूर्व सांसद जयाप्रदा के खिलाफ केमरी थाने में वीडियो अवलोकन टीम के प्रभारी कुलदीप भटनागर ने मुकदमा दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि उनके द्वारा जनसभा के दौरान सपा नेता आजम खां के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी,जिस पर आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया था।
जारी हुए थे गैर जमानती वारंट
पूर्व सांसद जयाप्रदा के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन के दो मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। दोनों ही मामलों में वह कोर्ट में पेश नहीं हो रही थीं, जिस पर कोर्ट ने कई बार गैर जमानती वारंट जारी किया था। कोर्ट ने 27 फरवरी 24 को नाराजगी जताते हुए पूर्व सांसद को फरार घोषित कर दिया था।
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साथ ही पुलिस को आदेश दिए थे कि उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाए। बाद सीओ के नेतृत्व में टीम गठित की गई ती। इसके बाद पूर्व सांसद जयाप्रदा ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में सरेंडर किया था।