स्वार। क्षेत्र के मधुपुरा गांव में एक महिला द्वारा दर्ज कराए गए दुष्कर्म के मुकदमे में इमाम और मस्जिद शब्दों के प्रयोग को लेकर मुस्लिम समुदाय में रोष व्याप्त है।
बृहस्पतिवार को जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद अहमद खतीबी के नेतृत्व में दर्जनों उलमा कोतवाली पहुंचे और एफआईआर में दोनों शब्दों का इस्तेमाल करने के दोषी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
उलेमाओं का कहना है कि जिस व्यक्ति गुलाम हुसैन के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया है, वह किसी मस्जिद का इमाम नहीं है और न ही घटना का संबंध मस्जिद से है।
इसके बावजूद प्राथमिकी में इमाम और मस्जिद जैसे संवेदनशील शब्दों का उल्लेख किया गया है, जो पूरी तरह से भ्रामक है। इससे मुस्लिम समुदाय की छवि को ठेस पहुंची है। इसकी जांच कर दोषी के खिलाफ समुचित धाराओं में केस दर्ज किया जाना चाहिए।
उलेमाओं ने पुलिस-प्रशासन से मांग की - विवेचना में इन शब्दों को हटाया जाए और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। इस दौरान जामा मस्जिद के इमाम मोहम्मद अहमद खतीबी ने कहा, हम कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन किसी धार्मिक पहचान को गलत तरीके से जोड़ना न केवल अनुचित है, बल्कि यह समाज में तनाव फैलाने का कार्य करता है।
कोतवाल प्रदीप मलिक ने उलेमाओं को निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित जांच का भरोसा दिलाया है। इस दौरान कारी मोहम्मद अहमद, मौलाना फिराग अहमद खां, कारी ज़ुल्फ़िकार, मुफ्ती अब्दुल रहमान, मौलाना नाजिम खां और मुफ्ती अनीस अहमद आदि रहे।