कहीं परचा बनवाने के लिए लंबी कतार तो कहीं दवा के लिए घंटों इंतजार। कहीं इलाज के लिए कराहते मरीज। हालत यह है कि एक-एक बेड पर दो तो कहीं तीन-तीन मरीज। यह तस्वीर है जिला अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों की। बुखार के कहर के बाद इस तरह की तस्वीर हर रोज देखी जा रही है। यह तस्वीरें सेहत विभाग की ग्रामीण इलाकों में की जा रही व्यवस्थाओं की पोल खोल रही है।
पूरा जिला बुखार के कहर से जूझ रहा है। ग्रामीण इलाकों की हालत खराब हो रही है, लेकिन सेहत महकमा ग्रामीण इलाकों में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। इसकी तस्वीर जिला अस्पताल में साफ दिख रही है। जिला अस्पताल के सभी वार्ड इस वक्त फुल चल रहे हैं। इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को बेड तक नहीं मिल पा रहा है। एक-एक बेड पर दो से तीन मरीज अपना इलाज कराने को मजबूर हो रहे हैं। ओपीडी में सुबह से ही मरीजों की भीड़ लगी रही है। डाक्टरों के केबिन के आगे तो मरीजों की लंबी कतार लग रही है। सुबह आठ बजे से लेकर दोपहर दो बजे के बाद तक यहां भीड़ लग रही है।
मरीज देखते-देखते डाक्टरों के पसीने छूट रहे हैं लेकिन भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है। कराहते मरीज अपनी बारी का घंटों इंतजार कर रहे हैं। वहीं दवा काउंटर पर भी दवा के लिए मरीजों को काफी इंतजार करना पड़ रहा है। यहां लंबी कतार सुबह से दोपहर तक लगी रहती है, लेकिन दिकक्तें हो रही हैं।
झोलाछाप के क्लीनिक में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ ः बुखार के कहर के बीच झोलाछाप डाक्टरों की चांदी हो गई है, लेकिन यहां लोगों की जिदंगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। गांवों और कसबों में दिन निकलते ही भीड़ लग रही है, झोलाछाप डाक्टर इलाज के नाम पर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं, लेकिन महकमा खमोश है।