सरकार जेल में बंद उन कैदियों को नेक चाल चलन के आधार पर समय से पूर्व रिहाई कर देती है। इसके साथ ही बुर्जुग कैदियों की भी रिहाई कर देती है। इसी क्रम में करीब पांच साल पहले जेल में उम्रकैद की सजा काट रही बिलासपुर के गांव गुलड़िया टोला निवासी फौजा सिंह की पत्नी कपूर कौर की रिहाई का प्रस्ताव जेल प्रशासन की सिफारिश के आधार पर प्रशासन ने भेजा था।
सालों तक फाइल अटकी रही और नतीजा यह हुआ उम्रकैद की सजा काट रही कपूर कौर ने पिछले साल दम तोड़ दिया। लापरवाही का आलम यह रहा कि कपूर कौर की रिहाई की फाइल फिर भी चलती रही और आखिरकार गत दिवस कारागार विभाग ने कपूर कौर की रिहाई के आदेश जारी कर दिए।
कारागार विभाग के विशेष सचिव की ओर से 17 अगस्त 2016 को इस तरह का आदेश जारी किया गया। मगर, इस आदेश के जारी करते वक्त न यह तक नहीं देखा गया कि उक्त महिला कैदी दुनिया है भी या फिर नहीं? यानि मरने के बाद भी जेल प्रशासन की निगाह में कपूर कौर सजा काट रही है।
यह था मामला- फौजा सिंह की पत्नी कपूर कौर पर आरोप है कि उसके रिश्तेदार अजीत सिंह से 1979 में किसी बात को लेकर दोनों पक्षो के बीच विवाद हो गया था, जिसमें अजीत सिंह की हत्या हो गई थी। पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। कपूर कौर को 28 मार्च 1981 रामपुर की कोर्ट से उम्रकैद की सजा हो गई थी,जिसके बाद परिवार के लोग हाईकोर्ट चले गए थे।
बाद में हाईकोर्ट ने उसी सजा को बहाल कर दिया था। तभी से वह जिला स्त्रत्त्जेल में रह रही थी। 2014 में उसको लखनऊ में नारी निकतेन में भेज दिया था,जहां 22 जून 2015 को उसकी मौत हो गई। उनकी लखनऊ में मौत हो गई थी। परिवार के लोग उनके शव को अपने घर ले आए थे। जहां उनके शव को घर पबर लाकर अतिंम संस्कार कर दिया गया।
यह महिला रामपुर जिला कारागार में 2007 से 2014 तक बंद रही थी। इसके बाद शासन के आदेश पर उन्हें नारी निकेतन लखनऊ शिफ्ट कर दिया गया था। रामपुर से इनकी रिहाई के लिए पूर्व में प्रस्ताव भेजा गया था। -अरुण कुमार सक्सेना, जेल अधीक्षक।