जिले में तंबाकू नियंत्रण अभियान सिर्फ दो एनजीओ प्रतिनिधियों के सहारे रह गया है। पहले मार्च और अब अप्रैल माह के छापेमार अभियान के हालात तो यही बयां कर रहे हैं।
यूपीवीएचए और आयुर्जीवनम सेवा समिति के पदाधिकारियों की मौजूदगी न होने के कारण मार्च और अप्रैल माह के छह शुक्रवार में सिर्फ एक बार ही अभियान चला है, जबकि अभियान की जिम्मेदारी स्वास्थ्य और प्रशासनिक अफसरों की भी है। अफसरों के गंभीर न होने के कारण अभियान दम तोड़ता जा रहा है।
जिले में तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की सफलता को लेकर शुरूआत में काफी प्रयास किए गए। सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान न करने के लिए चेतावनी पट्टिका लगाई गईं। अधिकारियों के साथ एनजीओ प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए सार्वजनिक स्थलों पर छापेमारी कर धूम्रपान पर शिकंजा कसने के लिए सचल दल का गठन किया गया।
ये कार्रवाई का सिलसिला दो माह बाद ही धड़ाम हो गया है। जनवरी-फरवरी माह में दो शुक्रवार को अभियान नहीं चलाया गया। मार्च में पांच शुक्रवार में सिर्फ एक शुक्रवार को ही अभियान चलाया गया। अप्रैल माह के पहले ही शुक्रवार को अभियान की हवा निकल गई। अधिकारी अपने काम में व्यस्त हैं और एनजीओ प्रतिनिधि भी किनारा करने लगे हैं। अब अभियान चलना ही बंद हो गया है।