रामपुर/बिलासपुर/केमरी/खजुरिया। नवरात्र में तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्र घंटा स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने घरों में पूजन कर माता से सभी बाधाओं के दूर होने का वर मांगा।
नवरात्र में तीसरे दिन शुक्रवार को भी श्रद्धालुओं ने घरों पर ही पूजा-अर्चना की। माता का रोली से तिलक कर पुष्प और फल अर्पित कर नवरात्र व्रत कथा का पाठ किया। इसके बाद आरती और दुर्गा चालीसा के पाठ के साथ ही अज्ञारी पूजन किया। अज्ञारी में श्रद्धालुओं ने हवन सामग्री के साथ ही धूप,कपूर, लौंग, सूखे मेवा, मिश्री-मिष्ठान, देशी घी के साथ आहुति देकर पूजन किया। इसके साथ ही कई श्रद्धालुओं ने दुर्गा सप्तसती का पाठ भी किया और इसके साथ कवच, कीलक और अर्गला स्तोत्र का पाठ किया।
पंडित संतोषशर्मा बताते हैं कि नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। मां चंद्रघंटा के शिख पर चंद्र और हस्त में घंटा होता है जो कि शांति और नाद के प्रतीक हैं। बताते हैं कि दुर्गा सप्तसती में मार्केंड्य ऋषि द्वारा वर्णन किया गया है कि असुरों से युद्ध के दौरान मां चंद्रघंटा ने अपने घंटों की नाद से ही कई असुरों का वध कर दिया था। मां चंद्रघंटा की आराधना से भक्तों की सभी प्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं। वहीं कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते शहर के पुराना गंज स्थित माई का थान मंदिर, श्री हरिहर मंदिर, श्री त्रिपुरेश्वरी शक्ति पीठ, सिविल लाइंस स्थित मां दुर्गा का प्राचीन मंदिर, मनोकामना मंदिर समेत सभी प्रमुख मंदिरों में पुजारियों पूजन किया। यहां श्रद्धालु नहीं पहुंचे।
बिलासपुर क्षेत्र में चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन शुक्रवार को श्रद्वालुओं ने मां दुर्गा के तीसरे स्वरुप मां चंद्रघंटा देवी की अपने घरों व मंदिरों में पूजा अर्चना की। नगर के मोहल्ला कायस्थान के कालीमाता मंदिर, श्री सनातन धर्म मंदिर साहूकारा, श्री सनातन धर्म मंदिर पंजाबी कालोनी, मां पीतांबरा मंदिर, दुर्गा भवानी पंचायती मंदिर डैम कालोनी, शिव मंदिर, शिवबाग मंडी का मंदिर, मनोरम मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, श्री कृष्णलीला मंदिर आदि मंदिरों में महिलाओं ने छंद गए और रात को आरती के के बाद व्रत को विश्राम दिया गया।