वर्ष 2005 और 2012 में आवंटित हुई नगर पंचायतों की दुकानों का किराया पिछले महीने तक केवल तीन सौ रुपये था। जबकि, इन दुकानों पर काबिज दुकानदार हर माह दुकान मालिकों को हजारों के हिसाब से किराया दे रहे है।
जिस कारण नगर पंचायत को लंबे समय से लाखों रुपये का चूना लगाया जा रहा है। अब इसी प्रकरण में डीएम जोगिंदर सिंह ने दुकान बेचने वाले और दुकानों को खरीदने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश ईओ और नगर पंचायत अध्यक्ष को दिए है।
वर्तमान में विभिन्न स्थानों पर नगर पंचायत की कुल 293 दुकानें है। इन सभी दुकानों को पूर्व में आवंटित कर दिया गया था, लेकिन जिन्हें यह दुकानें आवंटित की गई थी। उन्होंने नगर पंचायत के साथ धोखाधड़ी करते हुए दुकानें किराए पर दे दी थी। ईओ पुष्पेंद्र कुमार राठौर ने बताया कि इन दुकानों का किराया पिछले महीने तक केवल तीन सौ रुपये था, जिसे पिछले माह बोर्ड की बैठक में तीन सौ रुपये से बढ़ाकर दो हजार रुपये कर दिया गया है।
बावजूद इसके अब भी दुकानों के मालिक किरायदारों से करीब आठ से दस हजार रुपये महीना वसूल कर रहे है। ईओ ने बताया कि जांच में करीब 80 लोग ऐसे पाए गए है, जिनको दुकानें आवंटित की गई थी। वह दुकानदार इन पर काबिज नहीं है, उन्होंने यह दुकानें किराए पर दे दी है।
चर्चा है कि पूर्व में जिन्हें दुकानें आवंटित हुई थीं उन लोगों ने मोटी रकम वसूल करके दूसरों को दुकानें बेच दी थीं। सोमवार को डीएम जोगिंदर सिंह ने ईओ और नगर पंचायत अध्यक्ष को निर्देश दिए है, कि जल्द ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर कराई जाए, जिन्होंने दुकानें आवंटित करा ली थी और इसके बाद बेच दी थी या फिर किराए पर दे दी है।