परिवहन विभाग में रोजाना करीब 600 लाइसेंस बनने के लिए ऑनलाइन आवेदन होते हैं। पहले लर्निंग लाइसेंस बनता है और फिर स्थायी लाइसेंस बनवाने के लिए परीक्षण होता है। जिसमें देखा जाता है कि आवेदक को गाड़ी चलानी आती है या नहीं। इसमें पास होने के बाद ही स्थायी लाइसेंस बन जाता है। लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया लखनऊ निदेशालय से होती है।
लाइसेंस बनने के बाद परिवहन विभाग भेजा जाता है, जहां से डाक से संबंधित व्यक्ति के घर पहुंचाया जाता है। होली से कुछ दिन पहले लाइसेंस बनना बंद हो गए थे। रामपुर के 1000 हजार से अधिक लाइसेंस बनने थे। ऐसे में घर लाइसेंस नहीं पहुंचने पर लोग परिवहन विभाग के कार्यालय पहुंचे और पूछताछ की तो पता चला था कि लखनऊ निदेशालय में केएमएस यानी की-मैनेजमेंट सिस्टम में दिक्कत हुई है, जिससे लाइसेंस बनकर नहीं आ रहे हैं। एआरटीओ राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि तकनीकी समस्या दूर हो गई है। अब फिर से लाइसेंस बनकर विभाग में आना शुरू हो गए है।