स्वार। पीपली वन क्षेत्र में खैर की लकड़ी के कटान और तस्करी पर रोक लगाने में वन विभाग नाकाम नजर आ रहा है। नए रेंजर की तैनाती को अभी पंद्रह दिन भी नहीं हुए हैं, कि तस्करों से चुनौतियां मिलना शुरू हो गईं। बीते 24 घंटे के भीतर एक दरोगा और फॉरेस्ट गार्ड पर हमला हुआ और अगले दिन पीपली वन से काटी गई खैर की लकड़ी से लदी पिकअप बाहर निकाल कर ले जाने में सफल रहे। यह दो वारदातें बता रही हैं कि तस्कर, सिस्टम पर तस्कर हावी हैं।
बृहस्पतिवार को पीपली वन क्षेत्र में तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान हालात इतने बिगड़ गए थे कि एक वन दरोगा और फॉरेस्ट गार्ड के साथ मारपीट कर उनकी वर्दी तक फाड़ दी गई थी। इस दौरान फायरिंग भी हुई थी, लेकिन बाद में दबाव में आकर तहरीर बदल दिए जाने की चर्चा रही। यह मुठभेड़ शुक्रवार दोपहर हुई थी। इसी कड़ी में अगले ही दिन शुक्रवार को एक और मामला सामने आया, जब मुरादाबाद में वन विभाग की टीम ने खैर की लकड़ी से लदी एक पिकअप पकड़ ली। इस कार्रवाई में करीब 23 कुंतल प्रतिबंधित लकड़ी बरामद की गई और एक तस्कर को गिरफ्तार किया गया। हालांकि इस कार्रवाई को बड़ी सफलता माना जा रहा है, लेकिन सबसे अहम सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में खैर की लकड़ी आखिर पीपली वन क्षेत्र से कैसे काट ली गई। यदि यह लकड़ी पहले से इकट्ठा की गई थी, जैसा कि वन कर्मियों का कहना है, तो भी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
लगातार सामने आ रहे मामलों से साफ है कि तस्करों ने नए रेंजर को चुनौती दी है कि वनकर्मी उन्हें कटान और तस्करी से नहीं रोक पाएंगे। साफ जाहिर है कि वन क्षेत्र में तस्करों के हौसले बुलंद हैं और विभागीय कार्रवाई के बावजूद कटान व तस्करी पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। रेंजर रमाकांत सक्सेना ने बताया कि तस्करों के खिलाफ रणनीति बनाकर काम किया जा रहा है, जल्द ही सकारात्मक परिणाम आएंगे और तस्करों की गतिविधियों पर भी लगाम लगेगी।