रामपुर। मशहूर शायर मुनव्वर राणा का रविवार रात निधन हो गया। उनका रामपुर से गहरा नाता रहा है। वह रामपुर कई बार आए थे और अपनी शायरी के जरिये लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया था। शहर के शायरों ने मुनव्वर राणा को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी। नवाब के दौर में मिर्जा असद उल्लाह खां गालिब जैसे शायरों के जरिये रामपुर का नाम दुनिया भर में मशहूर हुआ। मुनव्वर राणा का भी रामपुर से गहरा नाता रहा। वह पहली बार 1990 में किला मैदान में उस्ताद रामपुरी की याद में हुए मुशायरे में आए थे। इसके बाद नगर पालिका परिषद और उसके बाद सपा सरकार के दौर में वर्ष 2014 में रामपुर आए। उन्होंने जौहर यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। तब मुनव्वर राणा ने कहा था कि रामपुर से उनका अटूट रिश्ता है और रामपुर में अदब नवाज लोग मौजूद हैं।
जौहर यूनिवर्सिटी में आयोजित कार्यक्रम में मुनव्वर राणा ने लोगों की फरमाइश पर मां पर लिखी अपनी कविता लबों पे उसके कभी बद्दुआ नहीं होती, बस एक मां है जो मुझसे खफा नहीं होती... सुनाकर खूब वाहवाही लूटी थी।
मशहूर शायर ताहिर फराज बताते हैं कि वर्ष 1990 में किला मैदान में आयोजित मुशायरे में आए मुनव्वर राणा यहां तीन दिन रुके थे। कहा कि उनके निधन से शायरी का एक दौर चला गया। शायर अजहर इनायती ने भी मुनव्वर राणा को श्रद्धांजलि दी। कहा कि उनके निधन से गहरा दुख हुआ।