रामपुर। रजा लाइब्रेरी में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों और ऐतिहासिक पुस्तकों का संग्रह देखना जिंदगीभर याद रहेगा। यह बात भारत में अफगानिस्तान के राजदूत मुफ्ती नूर अहमद नूर ने शनिवार को रामपुर की ऐतिहासिक रजा लाइब्रेरी के दौरे के दौरान कही।
उन्होंने लाइब्रेरी में संरक्षित दुर्लभ कुरआन और पश्तो भाषा की पांडुलिपियों का अवलोकन किया। साथ ही पुस्तकालय के ऐतिहासिक महत्व और यहां मौजूद बेशकीमती संग्रह की सराहना की। साथ ही पश्तो पांडुलिपियों से संबंधित कैटलॉग में कुछ भाषाई त्रुटियों की ओर ध्यान दिलाते हुए उन्हें ठीक कराने में सहयोग का भरोसा भी दिया।
पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां के निमंत्रण पर अफगानिस्तान के राजदूत शुक्रवार को नूर महल पहुंचे थे। शनिवार को वह अपने साथ आए अन्य राजनयिकों और भारतीय सांस्कृतिक निधि (इंटैक) के रुहेलखंड चैप्टर के सह-संयोजक काशिफ खां के साथ रजा लाइब्रेरी पहुंचे। यहां वरिष्ठ टेक्निकल रेस्टोरर अरुण सक्सेना, डॉ. अबुसाद इस्लाही, इसबाह खां, कमाल खां और मुख्तार अहमद ने उनका स्वागत किया।
लाइब्रेरी के भ्रमण के दौरान राजदूत ने दुर्लभ कुरआन और पश्तो भाषा की पांडुलिपियों को देखा। उन्होंने पुस्तकालय के इतिहास और रामपुर के नवाबों की ओर से इसके संग्रह को संरक्षित करने के प्रयासों की जानकारी भी प्राप्त की। पश्तो भाषा की पांडुलिपियों से संबंधित कैटलॉग में कुछ भाषाई त्रुटियां मिलने पर उन्होंने इन्हें दुरुस्त कराने में सहयोग का आश्वासन दिया। राजदूत ने लाइब्रेरी की आगंतुक पुस्तिका में अपने अनुभव भी दर्ज किए। उन्होंने लिखा कि यहां का दौरा उनके लिए जिंदगीभर याद रहने वाला अनुभव है। उनके इस दौरे को रामपुर और अफगानिस्तान के बीच साझा भाषाई व ऐतिहासिक विरासत के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लाइब्रेरी के दौरे के बाद अफगानिस्तान के राजदूत ने रामपुर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद का भी भ्रमण किया। रामपुर के नवाबों द्वारा बनवाई गई इस मस्जिद की स्थापत्य विशेषताओं और इतिहास के बारे में उन्होंने जानकारी प्राप्त की। जामा मस्जिद के इमाम मौलवी ऐतेसाम उल्ला खां ने उन्हें मस्जिद के इतिहास और उसकी विशेषताओं से अवगत कराया। भ्रमण के दौरान काशिफ खां सहित अन्य लोग मौजूद रहे।